Sunday 12 July 2020


शबे फ़िराक़ की तन्हाइयों से घबरा कर ।तुम्हारे मिलने की उम्मीद, आँख में पाकर। मचल कर आ गए आँखों में, दिल को ठुकरा कर।
बहुत तलाश किया तुम को, हर तरफ़ जाकर। 
न पाया जब तुम्हें वाँ भी, तो ग़म से घबरा कर। 
टपक के पलकों से, अश्कों ने ख़ुदकुशी कर ली।।.....
Troubled by, solitude of departure, at night. 
Hoping to find you in eyes, within sight. 
They surfaced in eyes and shunned the heart. 
Searched over and again, then part by part. 
Not finding, grief amassed,made to decide. 
Tears dropped from the eyes, to commit suicide...... 

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