Friday, 9 December 2022

AL-E-AHMAD SUROOR.. GHAZAL..

लोग तन्हाई का किस दर्जा गिला करते हैं 

और फ़नकार तो तन्हा ही रहा करते हैं 

वो तबस्सुम है कि 'ग़ालिब' की तरह-दार ग़ज़ल graceful 

देर तक उस की बलाग़त को पढ़ा करते हैं eloquence of written style

कोई जादू कोई जल्वा कोई मस्ती कोई मौज 

हम इन्हीं चंद सहारों पे जिया करते हैं 

दिन पे यारों को अँधेरे का गुमाँ होता है 
हम अँधेरे में किरन ढूँढ लिया करते हैं 

बस्तियाँ कुछ हुईं वीरान तो मातम कैसा 

कुछ ख़राबे भी तो आबाद हुआ करते हैं
Ruins

सुनने वालों की है तौफ़ीक़ सुनें या न सुनें 
capacity/divine grace
बात कहने की जो है हम तो कहा करते हैं 

साहिल ओ बहर के आईन सलामत न रहे
Rules of shore and waves don't exist. 
अब तो साहिल से भी तूफ़ान उठा करते हैं 
Storms can arise now even from shore. 
लोग ऐसी ही बातों में बहा देते हैं इस दौर का दर्द 
और अशआ'र में हम ढाल लिया करते हैं