Sunday 29 October 2023

MUNIIR NIAZI.. GHAZAL.. GHAM KI BARISH NE BHI TERE NAQSH KO DHOYA NAHIN......

ग़म की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहीं 
तू ने मुझ को खो दिया मैं ने तुझे खोया नहीं 

Even the grief rain, didn't wash your stain. 
You have lost me, but with me you remain. 

नींद का हल्का गुलाबी सा ख़ुमार आँखों में था 
यूँ लगा जैसे वो शब को देर तक सोया नहीं 

There was aftereffect, of sleep in eyes intact. 
It so 'd react , night long awake did I remain.

हर तरफ़ दीवार-ओ-दर और उन में आँखों के हुजूम 
कह सके जो दिल की हालत वो लब-ए-गोया नहीं 

Doors 'n windows around,lots of eyes abound.
What in heart is found, talking lips don't contain. 

जुर्म आदम ने किया और नस्ल-ए-आदम को सज़ा 
काटता हूँ ज़िंदगी भर मैं ने जो बोया नहीं 

Adam commited crime, offsprings suffer dime. 
I reap in life prime, what in soil I didn't retain. 

जानता हूँ एक ऐसे शख़्स को मैं भी 'मुनीर' 
ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं

O 'Muneer' I also know, one man in the show.
Grief 'd just endow, to stone but tears contain.

Wednesday 25 October 2023

SAHIR LUDHIYANVI.. GHAZAL.. CHEHRE PE KHUSHI CHHA JAATI HAI AANKHON MEN SURUUR AA JAATA HAI......

चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है आँखों में सुरूर आ जाता है 
जब तुम मुझे अपना कहते हो अपने पे ग़ुरूर आ जाता है 

Eyes get intoxicated, while there is joy on face. 
As you call me yours, pride runs at a fast pace. 

तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं 
महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है 

You are a world of beauty, probably unaware. 
As you show up in party, glow is all over the  place. 

हम पास से तुम को क्या देखें तुम जब भी मुक़ाबिल होते हो 
बेताब निगाहों के आगे पर्दा सा ज़रूर आ जाता है 

How to see from near, when you are across table. 
Before the restless eyes, a curtain gets in place. 

जब तुम से मोहब्बत की हम ने तब जा के कहीं ये राज़ खुला 
मरने का सलीक़ा आते ही जीने का शुऊ'र आ जाता है
 
It's when I loved you, this secret was revealed.
Learning death style , life ways come in place

Tuesday 24 October 2023

ANAND NARAYAN MULLA.. GHAZAL..JAB DIL MEN ZARAA BHI AAS N HO IZHAR - E-TAMANNA KAUN KARE

जब दिल में ज़रा भी आस न हो इज़्हार-ए-तमन्ना कौन करे 
अरमान किए दिल ही में फ़ना अरमान को रुस्वा कौन करे 

Why expose desire, when there is no hope? 
Engrave desires in heart, why let it unrope? 

ख़ाली है मिरा साग़र तो रहे साक़ी को इशारा कौन करे 
ख़ुद्दारी-ए-साइल भी तो है कुछ हर बार तक़ाज़ा कौन करे 

Cup is empty, let it be, why call the barmaid? 
Drunkard respect is at stake, why call after nope? 

जब अपना दिल ख़ुद ले डूबे औरों पे सहारा कौन करे 
कश्ती पे भरोसा जब न रहा तिनकों पे भरोसा कौन करे 

When my own heart drowns me, why call for help? 
Why lay  hope on straws, when ship offers no hope? 

आदाब-ए-मोहब्बत में भी अजब दो दिल मिलने को राज़ी हैं 
लेकिन ये तकल्लुफ़ हाइल है पहला वो इशारा कौन करे 

Two hearts are ready to meet, but on terms of love. 
One condition still remains, who signs for elope? 

दिल तेरी जफ़ा से टूट चुका अब चश्म-ए-करम आई भी तो क्या 
फिर ले के इसी टूटे दिल को उम्मीद दोबारा कौन करे 

Your neglect broke my heart, what caring look 'd do? 
With broken heart, why again' d I expect hope? 

जब दिल था शगुफ़्ता गुल की तरह टहनी काँटा सी चुभती थी 
अब एक फ़सुर्दा दिल ले कर गुलशन की तमन्ना कौन करे 

When heart bloomed, even branch 'd prick as thorn. 
Now heart is sad, state is bad, why have garden hope.? 

बसने दो नशेमन को अपने फिर हम भी करेंगे सैर-ए-चमन 
जब तक कि नशेमन उजड़ा है फूलों का नज़ारा कौन करे 

 I will also roam in garden,let my nest vibrate
With deserted nest, who can view flowers in scope? 

इक दर्द है अपने दिल में भी हम चुप हैं दुनिया ना-वाक़िफ़ 
औरों की तरह दोहरा दोहरा कर उस को फ़साना कौन करे 

A grief is in my heart too, world is unaware of. 
Repeated calls as others do, who'll make a tale to cope? 

कश्ती मौजों में डाली है मरना है यहीं जीना है यहीं 
अब तूफ़ानों से घबरा कर साहिल का इरादा कौन करे 

I have left the boat to waves, here to live 'n to die. 
Disturbed by storm, who' d go to shore, with what scope? 

'मुल्ला' का गला तक बैठ गया बहरी दुनिया ने कुछ न सुना 
जब सुनने वाला हो ऐसा रह रह के पुकारा कौन करे 

'Mulla' 's throat has gone sore, deaf world heard no more. 
When listener is this type, who' ll call whom with hope? 




Wednesday 4 October 2023

QATEEL SHAFAAI.. GHAZAL.. APNE HAATHON KI LAKEERON MEN SAJAA LE MUJH KO...

अपने हाथों की लकीरों में सजा ले मुझ को 

मैं हूँ तेरा तू नसीब अपना बना ले मुझ को 

मैं जो काँटा हूँ तो चल मुझ से बचा कर दामन 

मैं हूँ गर फूल तो जूड़े में सजा ले मुझ को 

तर्क-ए-उल्फ़त की क़सम भी कोई होती है क़सम 

तू कभी याद तो कर भूलने वाले मुझ को 

मुझ से तू पूछने आया है वफ़ा के मा'नी 

ये तिरी सादा-दिली मार न डाले मुझ को 

मैं समुंदर भी हूँ मोती भी हूँ ग़ोता-ज़न भी 

कोई भी नाम मिरा ले के बुला ले मुझ को 

तू ने देखा नहीं आईने से आगे कुछ भी 

ख़ुद-परस्ती में कहीं तू न गँवा ले मुझ को

बाँध कर संग-ए-वफ़ा कर दिया तू ने ग़र्क़ाब 

कौन ऐसा है जो अब ढूँढ निकाले मुझ को 

ख़ुद को मैं बाँट न डालूँ कहीं दामन दामन 

कर दिया तू ने अगर मेरे हवाले मुझ को 

मैं खुले दर के किसी घर का हूँ सामाँ प्यारे 

तू दबे-पाँव कभी आ के चुरा ले मुझ को 

कल की बात और है मैं अब सा रहूँ या न रहूँ 

जितना जी चाहे तिरा आज सता ले मुझ को 

बादा फिर बादा है मैं ज़हर भी पी जाऊँ 'क़तील' 

शर्त ये है कोई बाँहों में सँभाले मुझ को