Saturday, 31 December 2022

AARZOO LAKHNAVI... COUPLETS

किस ने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी 

झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी 



टैग्ज़ : ज़ुल्फ़ और 2 अन्य 
  
 
वफ़ा तुम से करेंगे दुख सहेंगे नाज़ उठाएँगे 

जिसे आता है दिल देना उसे हर काम आता है 



टैग्ज़ : इश्क़ और 2 अन्य 
 
 
बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से 

चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका 



टैग : काँटा 
 
 
जो दिल रखते हैं सीने में वो काफ़िर हो नहीं सकते 

मोहब्बत दीन होती है वफ़ा ईमान होती है 



टैग्ज़ : इश्क़ और 3 अन्य 
 
 
हद से टकराती है जो शय वो पलटती है ज़रूर 

ख़ुद भी रोएँगे ग़रीबों को रुलाने वाले 



 
 
 
भोले बन कर हाल न पूछ बहते हैं अश्क तो बहने दो 

जिस से बढ़े बेचैनी दिल की ऐसी तसल्ली रहने दो 



टैग : बेचैनी 
  
 
ख़मोशी मेरी मअनी-ख़ेज़ थी ऐ आरज़ू कितनी 

कि जिस ने जैसा चाहा वैसा अफ़्साना बना डाला 



टैग : ख़ामोशी

दफ़अतन तर्क-ए-तअल्लुक़ में भी रुस्वाई है 

उलझे दामन को छुड़ाते नहीं झटका दे कर 



टैग : रुस्वाई 
 
 
फिर चाहे तो न आना ओ आन बान वाले 

झूटा ही वअ'दा कर ले सच्ची ज़बान वाले 



टैग : वादा 
 
 
तेरे तो ढंग हैं यही अपना बना के छोड़ दे 

वो भी बुरा है बावला तुझ को जो पा के छोड़ दे 



 
 
 
शौक़ चढ़ती धूप जाता वक़्त घटती छाँव है 
बा-वफ़ा जो आज हैं कल बे-वफ़ा हो जाएँगे 

The ardour is rising sun, passing time shade on run. 
Today who are in faith,
 'll morrow  be off faith. 

 
SOME COUPLETS OF AARZOO LAKHNAVI... TRANSLATED BY RAVI MAUN 
 
जिस क़दर नफ़रत बढ़ाई उतनी ही क़ुर्बत बढ़ी 
अब जो महफ़िल में नहीं है वो तुम्हारे दिल में है 

As hate was on the  rise, nearness came as prize. 
Now what's not in mart,
 is lodged in your heart. 

मोहब्बत नेक-ओ-बद को सोचने दे ग़ैर-मुमकिन है 
बढ़ी जब बे-ख़ुदी फिर कौन डरता है गुनाहों से 

It's impossible to differentiate , as good 'n bad in love O mate ! 
When frenzy is in the din,
then who is afraid of sin?.... (1)

It's impossible in love for thoughts of good' n bad to sneak. 
Who is afraid of the sins,
 when intoxication is at  peak? 
 
हाथ से किस ने साग़र पटका मौसम की बे-कैफ़ी पर 
इतना बरसा टूट के बादल डूब चला मय-ख़ाना भी 

Who has thrown wine-cup, 
on weather's dull make-up? 
There was such cloud- burst, 
to drown even bar as a must. 
 
खिलना कहीं छुपा भी है चाहत के फूल का 
ली घर में साँस और गली तक महक गई

Has it ever been concealed? Love bloom is just revealed. 
While you breathe at home, fragrance in lane will roam.. (1)...

Blossoming of love - flower,
no one can ever contain. 
Breathe inside home, scent spreads across the lane.. (2)

जो कुछ था न कहने का सब कह गया दीवाना 
समझो तो मुकम्मल है अब इश्क़ का अफ़्साना 

What shouldn't have been told, was expressed by fanatic bold. 
If you can simply understand, love tale has reached the end.

ख़िज़ाँ का भेस बना कर बहार ने मारा 
मुझे दो-रंगी-ए-लैल-ओ-नहार ने मारा 

Adorning the autumn dress, spring ruined me in excess. 
I was gutted in this plight, 
by two colors of day 'n night..... (1)...

In disguise of autumn, I suffered spring- plight. 
In spring I was hurt by bi-colours of day' n night.. (2). 
 
सुकून-ए-दिल नहीं जिस वक़्त से उस बज़्म में आए 
ज़रा सी चीज़ घबराहट में क्या जाने कहाँ रख दी 

There's just no peace of heart, as I 'm in her group of a sort. 
Something that's so worthless, 
I misplaced while senseless. 

वाए ग़ुर्बत कि हुए जिस के लिए ख़ाना-ख़राब 
सुन के आवाज़ भी घर से न वो बाहर निकला 

Alas poverty O mate ! 
 For whom I am desolate. 
Was not even out of home, listening my call on roam. 
 
हर साँस है इक नग़्मा हर नग़्मा है मस्ताना 
किस दर्जा दुखे दिल का रंगीन है अफ़्साना 

Each breath is a sweet song, 
always brings frenzy along. 
How far grief-stricken heart, 
imparts colour to tale of art. 

 
   SOME COUPLETS OF AARZOO LAKHNAVI... TRANSLATED BY RAVI MAUN 
 
जिस क़दर नफ़रत बढ़ाई उतनी ही क़ुर्बत बढ़ी 
अब जो महफ़िल में नहीं है वो तुम्हारे दिल में है 

As hate was on the rise, nearness came as prize. 
Now what's not in mart,
 is lodged in your heart. 

मोहब्बत नेक-ओ-बद को सोचने दे ग़ैर-मुमकिन है 
बढ़ी जब बे-ख़ुदी फिर कौन डरता है गुनाहों से 

It's impossible to differentiate , as good 'n bad in love O mate ! 
When frenzy is in the din,
then who is afraid of sin? 
 
हाथ से किस ने साग़र पटका मौसम की बे-कैफ़ी पर 
इतना बरसा टूट के बादल डूब चला मय-ख़ाना भी 

Who has thrown wine-cup, 
on weather's dull make-up? 
There was such cloud- burst, 
to drown even bar as a must. 
 
खिलना कहीं छुपा भी है चाहत के फूल का 
ली घर में साँस और गली तक महक गई

Has it ever been concealed? Love bloom is just revealed. 
While you breathe at home, fragrance in lane is to roam. 

जो कुछ था न कहने का सब कह गया दीवाना 
समझो तो मुकम्मल है अब इश्क़ का अफ़्साना 

What shouldn't have been told, was expressed by fanatic bold. 
If you can simply understand, love tale has reached the end.

ख़िज़ाँ का भेस बना कर बहार ने मारा 
मुझे दो-रंगी-ए-लैल-ओ-नहार ने मारा 

Adorning the autumn dress, spring ruined me in excess. 
I was gutted in this plight, 
by two colors of day 'n night. 
 
सुकून-ए-दिल नहीं जिस वक़्त से उस बज़्म में आए 
ज़रा सी चीज़ घबराहट में क्या जाने कहाँ रख दी 

There's just no peace of heart, as I 'm in her group of a sort. 
Something that's so worthless, 
I misplaced while senseless. 

वाए ग़ुर्बत कि हुए जिस के लिए ख़ाना-ख़राब 
सुन के आवाज़ भी घर से न वो बाहर निकला 

Alas poverty O mate ! 
 For whom I am desolate. 
Was not even out of home, listening my call on roam. 
 
हर साँस है इक नग़्मा हर नग़्मा है मस्ताना 
किस दर्जा दुखे दिल का रंगीन है अफ़्साना 

Each breath is a sweet song, 
always brings frenzy along. 
How far grief-stricken heart, 
imparts colour to tale of art. 

 
  
 

Thursday, 29 December 2022

दुर्गा सप्तशती.. प्रथमोऽध्यायः.. ध्यानम्

ॐ खङ्गं चक्रगदेषुचापपरिघाञ्छूलं भुशुंडिं शारः
शङ्खं संधदतीं करैस्त्रिनयनां सर्वाङ्गभूषा-वृताम्।
नीलाश्मद्युतिमास्यपाददशकां सेवे महाकालिकां
यामस्तौत्स्वपिते हरौ कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम्।। 

मधु कैटभ के हनन हेतु ब्रह्मा जी ने जिन को ध्याया
उन्हीं महाकाली त्रिनेत्रि के पूजन को मैं भी आया।
दस हाथों में खड़ग चक्र हैं गदा बाण औ' परिघ शूल
मस्तक शङ्ख भुषुण्डि धरे हैं आभूषण माँ के अनुकूल। 
उनकी कान्ति नीलमणि की सी दस मुख दस पैरों से युक्त 
दिव्य अङ्ग हैं देवी माँ के कमलजन्मा  पूजन उपयुक्त।। 

REKHTA.. TODAY'S 5 +2 COUPLETS

tum mohabbat ko khel kahte ho
hum ne barbaad zindagi kar lii
..... BASHIR BADR..... 

You say that love is just a game.
 I 've ruined my life for the same.

sukuut-e-shab men dar-e-dil pe ek dastak thii
bikhar ga. ii tiri yaadon kii kahkashaan mujhse 
..... AMEER QAZALBASH..... 

 In the utter silence of night, was a knock on heart door so slight. 
Got scattered the milky- way
 of your memories by me this way. 

tum takalluf ko bhi ikhlaas samajhte ho 'faraz' 
dost hotaa nahiin har haath milaane waalaa
..... AHMAD FARAZ...

'Faraz' you think formality,
 is also an act of loyalty. 
Everyone who shakes hand,
 is surely not your friend. 

aur bhi dukh hain zamaane men mohabbat ke sivaa
raahten aur bhi hain vasl kii raahat ke sivaa
..... FAIZ AHMAD FAIZ..... 

There are  many types of pain
 in world, besides love domain. 
There are other ways of rest, besides love at it's best. 

duniya jise kahte hain jaaduu kaa khilaunaa hai. 
Mil Jaa. e to miTTii hai kho  Jaa. e to sonaa hai. 
...... NIDA FAZLI..... 

What you call world O boy! 
Is simply a magical toy. 
If you get it's speck of dust, 
it's loss as gold you adjust. 

tarashshoh haañ kare jis kī nahīñ par 
mirī sau jaañ tasadduq us nahīñ par
...MEER MEHDI MAJROOH...

Whose no brings drizzle from  sky. 
I sacrifice hundred lives on that nei. 

vaqt badlā log badle ab kahāñ vo mastiyāñ 
jab koī lai chheḌtā thā jhūmtī thiiñ hastiyāñ
..... MOAZZAM AZM..... 

Times 'n people saw a change, that frenzy is now out of range. 
When someone 'd set a tune, lives  would sway so soon. 


Tuesday, 27 December 2022

ॐ नन्दा भगवती नाम या भविष्यति नन्दजा। 
स्तुता सा पूजिता भक्त्या वशीकुर्याज्जगत्त्रयम्।। 

नन्दा नामक देवि जो जन्म नन्द घर लेयँ। 
भक्तिसहित पूजा स्तुति त्रैलोकी वश देयँ।। 
कनकोत्तमकान्तिः सा सुकान्तिकनकाम्बरा। 
देवी कनकवर्णाभा कनकोत्तमभूषणा।। 

कनक रंग की कान्ति, सुनहरे वस्त्र करें माँ धारण। 
आभा उनकी सोने की सी, सोने के आभूषण।। 



PARVEEN SHAKIR.. IMAGE COUPLETS

फिर भी न मेरा क़ाफ़िला लुटने से बच सका
मैंने ख़बर तो रक्खी थी एक एक घाट की

My caravan couldn't be saved from plunder here, .
 Though I had kept track of each and every tier. 

मस'अला जब भी चिरागों का उठा
फ़ैसला सिर्फ़ हवा करती है 

Whenever there's a problem with lamps.
 Only wind imparts judicial stamps. 

मौसम का अज़ाब चल रहा है
बारिश में गुलाब जल रहा है 

Calamities of weather are on move. 
Burning of rose in rains can prove. 

जिस पर दिल सारे अहद भूल गया 
भूलने का सवाल था क्या था 

For whom heart forgot every promise. 
Was worth forgetting or kept on trellis? 

पलट कर फिर यहीं आ जाएँगे हम
वो देखें तो हमें आज़ाद कर के

I 'll get back at same stage. 
Let him set me out of cage. 

ख़ुद अपने से मिलने का तो यारा न था मुझ में 
मैं भीड़ में गुम हो गई तन्हाई के डर से

Friendship with self I couldn't atone. 
So got into crowd, afraid of being alone. 

कभी अर्श पर कभी फ़र्श पर
 कभी  इन का डर कभी दर-बदर
ग़म-ए-आशिक़ी तिरा शुक्रिया 
हम कहाँ कहाँ से गुज़र गए

At times on sky, at times on
 the floor
afraid of him, moving from door to door. 
Thanks to you pain of love once again 
O I'm on the way, just come 
what may. 

क़ैद में गुज़रेगी जो उम्र बड़े काम की थी
पर मैं क्या करती कि ज़ंजीर तिरे नाम की थी

Behind bars what 'd be spent, was an age very well meant. 
What could I do in the game? Chains had borne your name. 

बदल देना है रस्ता या कहीं पर बैठ जाना है
कि थकता जा रहा है हम-सफ़र आहिस्ता-आहिस्ता

Either change the way there,
 or sit and wait somewhere. 
Slowly slowly on the ways, 
mate's exhausting 'n sways. 

देने वाले की मशिय्यत पे है सब कुछ मौक़ूफ़
मांगने वाले की हाजत नहीं देखी जाती

काँप उठती हूँ मैं ये सोच के तन्हाई में 
मेरे चेहरे पे तिरा नाम न  पढ़ ले कोई

 I tremble when alone
 and lose face tone? 
Let no one retrace,
 your name on my face. 


जुस्तजू खोए हुओं की उम्र भर करते रहे
चाँद के हमराह हम हर शब सफ़र करते रहे

In seach of those lost, 
whole life was lost. 
Enroute with the glow
 of moon was show

बख़्त से कोई शिकायत है न अफ़्लाक से है
ये ही क्या कम है कि निस्बत मुझे इस ख़ाक से है

There's no malice with fate, have no calamity to state. 
Is that less of a trust? 
I am related to this dust. 


शब की तन्हाई में अब तो अक्सर 
गुफ़्तुगू ख़ुद से रहा करती है

Night of solitude, 
often sets prelude. 
There is self talk 
on every life walk


REKHTA.. TODAY'S 5 COUPLETS

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाए..... बशीर बद्र......

Let the glow of your memories be ever with me. 
Who knows, which lane marks the eve' of  life?

दिल ना-उम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है 
..... फ़ैज़ अहमद फ़ैज़.....

Hopeless isn't the heart,
 just useless on it's part.
Though long is grief eve',
but it is still an eve !

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है 
हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है..... हसरत मोहानी .....

Silently whole day and night, shedding tears in memory plight.
I  remember it even now, 
 period of love every how.

वो कोई दोस्त था अगले दिनों का
जो पिछली रात से याद आ रहा है
..... नासिर काज़मी.....

He was a good friend of old times. 
Night's gone yet memory bell  chimes.

जी ढूँडता है फिर वही फ़ुर्सत के रात दिन 
बैठे रहें तसव्वुर-ए-जानाँ किए हुए 
..... मिर्ज़ा ग़ालिब.....

Still in search is the heart, 
day 'n night of rest on it's part.
Imagining about sweetheart, sitting out from the start. 

चश्म पुर-नम ज़ुल्फ़ आशुफ़्ता निगाहें बे-क़रार 
इस पशीमानी के सदक़े मैं पशीमाँ हो गया ..... जिगर मुरादाबादी.....

Teary eyes in distress, distressed is the tress.
Your reprisal in remorse, 
I am repentant of course. 

Monday, 26 December 2022

REKHTA.. TODAY'S 5 COUPLETS.....

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो 
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो...... निदा फ़ाज़ली..... 

There will be sun enroute, come if you can O cute! 
There are many in the crowd,
you too can come out aloud. 

ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं 
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं 
...... माहिर - उल-क़ादरी....
Saying so encouraged me the heart. 
After grief sun do joy shades start. 

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो 
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो 
..... निदा फ़ाज़ली..... 

Come out in the sun, 
bathe in rain on the run. 
Reality in life you will see,
 get out of books, just be. 

दर्द की धूप में सहरा की तरह साथ रहे 
शाम आई तो लिपट कर हमें दीवार किया 
..... अता शाद..... 

In the sunlight of grief sustained, as desert along with we remained. 
When the evening came around, embraced and walled the ground. 

चश्म-पोशों से रहूँ 'शाद' मैं क्या आईना-दार
मुँह पे काना नहीं कहता है कोई काने को
..... शाद लखनवी..... 

'Shaad' from those who avert look, 
how long mirror - holding took? 
On face none calls one-eyed,
 to one not seeing on one side. 

यही मिलने का समय भी है बिछड़ने का भी 
मुझ को लगता है बहुत अपन से डर शाम के बाद..... कृष्ण बिहारी नूर..... 

It's the time to meet 
'n also parting treat.
 With self, I am very afraid,
after fairwell, evening bade. 


पलकों के सितारे भी उड़ा ले गई 'अनवर' 
वो दर्द की आँधी कि सर-ए-शाम चली थी
..... अनवर मसूद..... 

Flew with eyelash's star, 
O 'Anwar' it took that far. 
A storm of pain that blew, 
since evening to continue. 

सुन चुके जब हाल मेरा ले के अंगड़ाई कहा
किस ग़ज़ब का दर्द ज़ालिम तेरे अफ़साने 
 में था..... शाद अज़ीमाबादी.....

Having listened to my state, she stretched limbs to state.
How intense was the pain,
 O cruel did your tale contain! 

KAIFI AAZMI.. GHAZAL.. MILE NA PHOOL TO KAANTON SE DOSTII KAR LII......


मिले न फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली 

इसी तरह से बसर हम ने ज़िंदगी कर ली 

अब आगे जो भी हो अंजाम देखा जाएगा 

ख़ुदा तलाश लिया और बंदगी कर ली 

नज़र मिली भी न थी और उन को देख लिया 

ज़बाँ खुली भी न थी और बात भी कर ली 

वो जिन को प्यार है चाँदी से इश्क़ सोने से 

वही कहेंगे कभी हम ने ख़ुद-कुशी कर ली

क्षमाप्रार्थना.. देवी दुर्गा...... हिन्दी पद्यानुवाद ... रवि मौन...

अपराध सहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरी।। 
अपराध मुझसे अनगिनत  होते रहे दिन - रात ही।
निज दास मान कृपा करें, व क्षमा करें परमेश्वरी।।

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। 
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि।। 

आह्वान भी जानूँ न करना औ' विसर्जन भी नहीं।
पूजा न करना जानता मैं, दें क्षमा परमेश्वरी।।

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि ।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे।। 

बिन मंत्र, भक्ति व क्रिया के पूजन किए मैंने सभी। 
कर कृपा सब पूरण करें हे देवि ! हे सर्वेश्वरी।।

अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत्। 
यां गतिं समवाप्नोति न तां ब्रह्मादयः सुराः।। 

जगदम्ब कह, यदि सैकडों अपराध कर, जाए शरण।
गति वह मिले जो पाएँ न ब्रह्मादि, सारे देवगण।।

सापराधोऽस्मि शरणं प्राप्तस्त्वां जगदम्बिके।
इदानीमनुकम्प्योऽहं यथेच्छसि तथा कुरु।।

हूँ मैं अपराधी जगदम्बा, आया शरण तिहारी।
दया पात्र इस समय, कीजिए जो इच्छा महतारी।।

अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम्।
तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि।। 

 बुद्धि भ्रम, अज्ञान से, सब भूल मैंने हैं करी।
देवी प्रसन्न रहें, क्षमा कीजे मुझे परमेश्वरी।। 

कामेश्वरि जगन्मातः सच्चिदानंदविग्रहे।
गृहाणार्चामिमां प्रीत्या प्रसीद परमेश्वरि।। 

सत् चित् आनन्द स्वरूप, पूजा लीजिए परमेश्वरी। 
हे जगत माता हों प्रसन्न, कृपा करें कामेश्वरी।। 

गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम्। 
सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादात्सुरेश्वरि।। 

गुप्त से भी गुप्त हैं जो वस्तु हे परमेश्वरी! 
रक्षा करें, यह याचना, लें जप, कृपा दें, सिद्धि भी।। 





माँ चण्डिका पूजन श्लोक... हिन्दी पद्यानुवाद.... रवि मौन

यो न पूज्यन्ते नित्यं चण्डिका भक्तवत्सलाम्। 
भस्मीकृत्यास्य पुण्यानि निर्दहेत्परमेश्वरी।। 

जो भक्त वत्सला मात चण्डी का न नित पूजन करें।
 माँ भगवती परमेश्वरि उनके सर्व पुण्य दहन करें।।


REKHTA.. TODAY'S 5 +23 COUPLETS

कुछ नज़र आता नहीं उस के तसव्वुर के सिवा 
हसरत-ए-दीदार ने आँखों को अंधा कर दिया....हैदर अली आतिश .....

Nothing but her comes in view,
when she's in mental review. 
Longing to see her in kind, 
has turned my eyes blind. 

अजीब शय है तसव्वुर की कार-फ़रमाई
हज़ार महफ़िल-ए-रंगीं शरीक-ए-तन्हाई
..... पयाम फ़तेहपुरी..... 

Imagination is so strange, 
it brings within it's range. 
From the solitude to share, to thousand colour groups there. 

एक चेहरा है जो आँखों में बसा रहता है 
इक तसव्वुर है जो तन्हा नहीं होने देता 
..... जावेद नसीमी..... 

Well, there is a face, 
with eyes as it's base. 
In mind is her thought zone, 
which never leaves me alone. 

उन का ग़म उन का तसव्वुर उन की याद 
कट रही है ज़िंदगी आराम से 
..... महशर इनायती..... 

Her grief, memory and thought.
An ease to life, it has brought. 

कितना है बद-नसीब 'ज़फ़र' दफ़्न के लिए 
दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में 
..... बहादुर शाह ज़फ़र..... 

How ill-fated is 'Zafar' that for the burial of his remains?
Couldn't find two yards of space within the lover's lanes. 

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता 
कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता 
..... निदा फ़ाज़ली .....

None ever gets the whole universe. 
Either land or sky is always adverse. 

जब मैं चलूँ तो साया भी अपना न साथ दे 
जब तुम चलो ज़मीन चले आसमाँ चले 
..... जलील मानिकपुरी..... 

Not even my shadow comes along, when I move.
 Even  the earth and sky, your motions approve. 


नई ज़मीन नयाआसमाँ नई दुनिया 
अजीब शय ये तसव्वुर ख़याल होता है
..... यगाना चंगेज़ी ..... 

A new world, new earth and new sky appear. 
Imagination is a strange thing that can steer


करूँगा क्या जो मोहब्बत में हो गया नाकाम 
मुझे तो और कोई काम भी नहीं आता 
..... ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर..... 

What 'll I do, if in love, I fail?
No other job can I ever avail. 

जादू है या तिलिस्म तुम्हारी ज़बान में 
तुम झूट कह रहे थे मुझे ए'तिबार था 
..... बेख़ुद देहलवी..... 

I believed you, even knowing that it was a lie. 
It's a miracle or magic, when you speak high. 

ये क्या तिलिस्म है क्यूँ रात भर सिसकता हूँ 
वो कौन है जो दियों में जला रहा है मुझे 
..... साक़ी फ़ारूक़ी..... 

What's this magic that I swoon whole night? 
Who is burning me in the lamps for light? 

हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन 
दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है..... मिर्ज़ा ग़ालिब..... 

Facts of heaven though, 
I just very  well know. 
To appease the heart,
 'Ghalib'! Move is smart. 

चला था ज़िक्र ज़माने की बेवफ़ाई का 
सो आ गया है तुम्हारा ख़याल वैसे ही 
..... अहमद फ़राज़..... 

About the faith loss, 
world was on a toss. 
For nothing, your name, appeared in the frame. 

आईने में वो देख रहे थे बहार-ए-हुस्न 
आया मिरा ख़याल तो शर्मा के रह गए 
..... हसरत मोहानी..... 

In mirror was looking that cutie, 
 On spring of her own beauty! 
When I got in her mind, 
she felt shy of a kind

कभी सहर तो कभी शाम ले गया मुझसे
तुम्हारा दर्द कई काम ले गया मुझसे
..... फ़रहत अब्बास शाह.....

At times did dawn it book,
 at times, the eve' it took. 
In many ways your grief, 
has used me in her fief. 

शब-ए-इंतिज़ार की कश्मकश में न पूछ कैसे सहर हुई 
कभी इक चराग़ जला दिया कभी इक चराग़ बुझा दिया 
..... मजरूह सुल्तानपुरी..... 

In the tussle of waiting night, don't ask how was dawn light? 
At times, a lamp was lit on,
at times a lamp was blown. 

ज़बाँ ज़बाँ पे शोर था कि रात ख़त्म हो गई 
यहाँ सहर की आस में हयात ख़त्म हो गई..... महताब ज़फ़र..... 

On every tongue was the noise, that night had lost it's poise. 
Here in the hope of dawn, 
my whole life has gone. 

कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी 
सुनते थे वो आएँगे सुनते थे सहर होगी 
..... फ़ैज़ अहमद फ़ैज़..... 

O heart! When will pain stay? When will night end it's sway? 
It's heard that she 'd emerge,  that dawn was on it's verge. 

शाम से आँख में नमी सी है 
आज फिर आप की कमी सी है 
.....गुलज़ार .....

Eyes are a little moist since eve'. 
Today, your absence I reperceive. 

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है 
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है 
..... फ़ैज़ अहमद फ़ैज़..... 

Hopeless isn't the heart, 
just useless on it's part. 
Long is the grief's eve', 
but still it's just an eve'! 

मुझे अब तुम से डर लगने लगा है 
तुम्हें मुझ से मोहब्बत हो गई क्या 
..... जौन एलिया..... 

Now I am afraid of you. 
Did I fall in love too ? 

दिल को तिरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है 
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता..... अहमद फ़राज़..... 

Your liking in this heart, 
is so confident a part. 
And the fear of losing you,
 always appears to be due. 

यही मिलने का समय भी है बिछड़ने का भी
मुझको लगता है बहुत अपने से डर शाम के बाद..... कृष्ण बिहारी नूर..... 

This is the time to meet, 
also to depart as a feat. 
With the self I am so afraid, 
when fairwell, eve' has bade. 

ये दाग़ दाग़ उजाला ये शब-गज़ीदा सहर 
वो इंतिज़ार था जिस का ये वो सहर तो नहीं..... फ़ैज़ अहमद फ़ैज़..... 

Bearing marks of chains is this light, 
this dawn being  hurt by night. 
What we had been waiting for, that dawn hadn't arrived so far. 

ये दश्त वो है जहाँ रास्ता नहीं मिलता 
अभी से लौट चलो घर अभी उजाला है 
..... अख़्तर सईद ख़ान..... 

This desert is such to say, where you don't find a way. 
From now on just get back,
 to home lighted is the track. 

अंधेरों को निकाला जा रहा है 
मगर घर से उजाला जा रहा है 
..... फ़ना निज़ामी कानपुरी..... 

Darkness is being told to take leave. 
But from home, light's going to leave. 

दिल की दहलीज़ पे जो शाम का साया उतरा
उफ़क़-ए-दर्द से सीने में उजाला उतरा
..... हसन आबिदी..... 

On the heart's foot strip, when  shade of eve' had a grip. 
From the horizon of pain, descended light to remain. 

दिल मुब्तला-ए-हिज्र रिफ़ाक़त में रह गया 
लगता है कोई फ़र्क़ मोहब्बत में रह गया 
..... नदीम भाभा..... 

So engrossed in depart, 
with you was the heart.
 May be a gap was there, 
in our love somewhere. 











Sunday, 25 December 2022

GREETINGS... RAVI MAUN

जो लोग गुज़रते हैं मुसलसल रह-ए-दिल से
दिन ईद का उन को हो मुबारक तह-ए-दिल से

Those who constantly pass, through road to heart cross. 
For day of Eid on their part, 
I greet from bottom of heart. 

उस से मिलना तो उसे ईद-मुबारक कहना 
ये भी कहना कि मिरी ईद मुबारक कर दे 
..... दिलावर अली आज़र..... 

If her you happen to meet,
 pass her my Eid greet. 
Greet me Eid this way, 
meet and make my day. 

ये बे-ख़ुदी ये लबों की हँसी मुबारक हो 
तुम्हें ये सालगिरह की ख़ुशी मुबारक हो 
..... अज्ञात..... 

A mindless smile as lips meet. 
To you, happy anniversary greet

हसीन चेहरे की ताबिंदगी मुबारक हो 
तुझे ये साल-गिरह की ख़ुशी मुबारक हो 
अज्ञात


Saturday, 24 December 2022

REKHTA.. TODAY'S 5 +23 COUPLETS

मुसलसल हादसों से बस मुझे इतनी शिकायत है 
कि ये आँसू बहाने की भी तो मोहलत नहीं देते..... वसीम बरेलवी..... 

With calamities so constant, 
I have only this to lament. 
Even for the tears to be shed, 
these don't give time instead. 

ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते 
जो आज तो होते हैं मगर कल नहीं होते 
..... अहमद फ़राज़..... 

All the dreams as such, don't constantly touch. 
Theose which are seen today, tomorrow lose sheen on way. 

इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की 
आज पहली बार उस से मैं ने बेवफ़ाई की 
अहमद फ़राज़ 

So persistent and this way, 
were troubles of parting day. 
Today to her first time, I was faithless not caring a dime. 

जो लोग गुज़रते हैं मुसलसल रह-ए-दिल से
दिन ईद का उन को हो मुबारक तह-ए-दिल से

Those who constantly pass, through road to heart cross. 
For day of Eid on their part, 
I greet from bottom of heart. 

उस से मिलना तो उसे ईद-मुबारक कहना 
ये भी कहना कि मिरी ईद मुबारक कर दे 
..... दिलावर अली आज़र..... 

If her you happen to meet,
 pass her my Eid greet. 
Greet me Eid this way, 
meet and make my day. 

ये बे-ख़ुदी ये लबों की हँसी मुबारक हो 
तुम्हें ये सालगिरह की ख़ुशी मुबारक हो 
..... अज्ञात..... 

A mindless smile as lips meet. 
To you, happy anniversary greet

हसीन चेहरे की ताबिंदगी मुबारक हो 
तुझे ये साल-गिरह की ख़ुशी मुबारक हो 
अज्ञात 

Fresh, lovely face is worth a meet. 
To you, happy anniversary greet. 

हम हुए तुम हुए कि 'मीर' हुए 
उस की ज़ुल्फ़ों के सब असीर हुए 
..... मीर तक़ी मीर..... 

It's to 'Mir', I or you address. 
All are captives of her tress.

आख़िर को रूह तोड़ ही देगी हिसार-ए-जिस्म 
कब तक असीर ख़ुशबू रहेगी गुलाब में 
..... आनिस मुईन 

Finally, soul would break body close bonds. 
How long fragrance can be in rose bonds?

ऐ जुनूँ फिर मिरे सर पर वही शामत आई 
फिर फँसा ज़ुल्फ़ों में दिल फिर वही आफ़त आई..... आसी ग़ाज़ीपुरी..... 

O frenzy it's once again, same calamity on head terrain. 
Heart is entangled in tress, same trouble I need address. 

छेड़ती हैं कभी लब को कभी रुख़्सारों को 
तुम ने ज़ुल्फ़ों को बहुत सर पे चढ़ा रक्खा है..... ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी.....

 At times it teases lips, 
gives cheeks lovely tips. 
Tress transgresses instead, you have put it on the head. 

जब यार ने उठा कर ज़ुल्फ़ों के बाल बाँधे 
तब मैं ने अपने दिल में लाखों ख़याल बाँधे..... मोहम्मद रफ़ी सौदा..... 

When it was tress that my love, lifted and tied in knot above. 
Then me too on my part, 
set lacs of thoughts in heart. 

बहुत मुश्किल है दुनिया का सँवरना 
तिरी ज़ुल्फ़ों का पेच-ओ-ख़म नहीं है 
..... असरार-उल-हक़ मजाज़..... 

World is so difficult to dress.
 It isn't your disheveled tress. 

और इस से पहले कि साबित हो जुर्म-ए-ख़ामोशी 
हम अपनी राय का इज़हार करना चाहते हैं...... सलीम कौसर...... 

Before it's proved on fence, 
that I am guilty of silence. 
Me too wants to press,
 have an opinion to express. 

दोस्ती जब किसी से की जाए 
दुश्मनों की भी राय ली जाए 
..... राहत इन्दौरी..... 

When ever you want to be friends. 
An opinion of foes ammends. 

राय पहले से बना ली तू ने 
दिल में अब हम तिरे घर क्या करते 
..... परवीन शाकिर..... 

You have a ready made view from start. 
Now how can I get set in your heart? 

मेरी ग़ुर्बत को शराफ़त का अभी नाम न दे 
वक़्त बदला तो तिरी राय बदल जाएगी 
..... निदा फ़ाज़ली..... 

Don't name my exile, 
as decency for a while. 
As and when times change, your view may have a new range. 

ये ए'तिमाद भी मेरा दिया हुआ है तुम्हें 
जो मेरे मशवरे बे-कार जाने लग गए हैं 
.....  अज़हर फ़राग़..... 

Your confidence has been given by me. 
Now that my suggestions,
 you  oversee. 

वतन की फ़िक्र कर नादाँ मुसीबत आने वाली है 
तिरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में 
..... अल्लामा इक़बाल..... 

Care about nation O innocent ! Still the trouble is nascent. 
Opinion to ruin you, 
is within high sky's view. 

कौन सा जुर्म ख़ुदा जाने हुआ है साबित 
मशवरे करता है मुंसिफ़ जो गुनहगार के साथ..... सलीम सिद्दीक़ी..... 

Which crime God only knows, that this approval bestows. 
That judge and the convict, seek opinions for  verdict. 

मैं जुर्म का ए'तिराफ़ कर के 
कुछ और है जो छुपा गया हूँ 
..... जौन एलिया..... 

 About the crime, I did endorse. 
Concealed something of course. 

जुर्म में हम कमी करें भी तो क्यूँ 
तुम सज़ा भी तो कम नहीं करते 
..... जौन एलिया..... 

Why should I reduce the crime? 
Sentence! You don't cut a
 dime. 

ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं 
और क्या जुर्म है पता ही नहीं 
..... कृष्ण बिहारी नूर..... 

Bigger than the life, there's no sentence.
And you don't even know the offence. 

आप ही की है अदालत आप ही मुंसिफ़ भी हैं 
ये तो कहिए आप के ऐब-ओ-हुनर देखेगा कौन..... मंज़र भोपाली..... 

This court is just your's,
 you are judge of course. 
Who can seek advice? 
About your virtue 'n vice! 

मुन्सिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे 
मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँ नहीं देते..... अहमद फ़राज़..... 

When you have to decide, 
how can you judge my side? 
Why don't you penalize? 
If my crime is that size ! 

मेरा क़ातिल ही मेरा मुंसिफ़ है 
क्या मिरे हक़ में फ़ैसला देगा 
..... सुदर्शन फ़ाकिर..... 

My murderer is my judge. 
In my favour will he fudge? 

वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन 
उसे इक ख़ूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा..... साहिर लुधियानवी..... 

A tale that can't be lead, 
to a conclusion, instead. 
Give it a lovely twist 
and leave it in midst. 
 
हथेली से ठंडा धुआँ उठ रहा है 
यही ख़्वाब हर मर्तबा देखती हूँ
..... फरीहा नक़्वी..... 

Awaiting the union is a matter of plight. 
So I dream about him each night. 




Friday, 23 December 2022

श्रीगणेश स्तुति एवम् हिन्दी रूपांतरण

वेदवाणि कुण्ठित जिन के प्रति, मन की पहुँच नहीं है। 
नेति - नेति कह कह कर  जिनकी स्तुति वेदों ने की है।
जो परब्रह्म, सच्चिदानंद स्वरूप कहे जाते हैं। 
उन्हीं गणेश, गुणेश के भजन नमन किए गाते हैं।

रूपांतरण.. रवि मौन

मूल श्लोक....

यतो वेदवाचो विकुण्ठा मनोभिः
सदा नेति नेतीति यत्ता गृणन्ति। 
परब्रह्मरूपं चिदानन्दभूतं
सदा तं गणेशं नमामो भजामः।। 

(श्रीगणेशपुराण ,उपासनाखण्ड 91/52)

REKHTA.. TODAY'S 5 + 22 COUPLETS

ख़बर-ए-तहय्युर-ए-इश्क़ सुन न जुनूँ रहा न परी रही 
न तो तू रहा न तो मैं रहा जो रही सो बे-ख़बरी रही..... सिराज औरंगाबादी..... 

Listen to premonition of love, neither there's frenzy nor lover. 
Neither you nor me remain, only senselessness is a cover. 

है मिरे पहलू में और मुझ को नज़र आता नहीं 
उस परी का सेहर यारो कुछ कहा जाता नहीं..... वलीउल्लाह मुहिब..... 

She is by my side, but can
 not still be seen. 
Her fairy magic O chums, words can't screen. 

इस दिल में तिरे हुस्न की वो जल्वागरी है 
जो देखे है कहता है कि शीशे में परी है 
..... जोश मिली आबादी..... 

Your beauty on this heart, has so much to impart. 
Who ever gets eye pass, says "nymph is in glass". 

इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर आ सको तो आओ 
मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है 
..... मुस्तफ़ा ज़ैदी..... 

Walk over stones 'n come,
 if you can whole some. 
There is no milky way,
to my home, so to say. 

कौन इस घर की देख-भाल करे 
रोज़ इक चीज़ टूट जाती है 
...... जौन एलिया..... 

Who can take care of this home? 
Something breaks daily as epitome. 

आइना देख कर तसल्ली हुई 
हम को इस घर में जानता है कोई 
..... गुलज़ार..... 

I was satisfied, as the 
mirror  verified. 
In this home someone, 
knows me as one. 

हमारी मुस्कुराहट पर न जाना 
दिया तो क़ब्र पर भी जल रहा है 
..... आनिस मुईन..... 

Don't go after my smile shows. 
On grave too, one lamp glows. 

दिल के फफूले जल गए सीने की आग से
इस घर को आग लग गई घर के घराग़ से
..... महताब राय ताबां.....

Heart blisters were afire, 
by the chest on fire. 
One home lamp afire,
burnt this home entire. 

जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथ 
जाने क्यूँ लोग मिरे नाम से जल जाते हैं 
..... क़तील शफ़ाई..... 

When ever my name, 
is taken with your name. 
I don't know the game, my name sets men aflame. 

क्या अजब कार-ए-तहय्युर है सुपुर्द-नार-ए-इश्क़
घर में जो था बच गया और जो नहीं था जल गया..... सलीम कौसर..... 

What a strange wonder, is to fire of love surrender. 
Everythig in the house is entire, what wasn't there, set afire. 

ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें 
साक़िया साक़िया सँभाल हमें 
..... अहमद फ़राज़..... 

Again on wings it sought, 
I am  on some thought. 
O bar-maid! O bar-maid! 
Hold me, give some aid. 

साक़िया तिश्नगी की ताब नहीं 
ज़हर दे दे अगर शराब नहीं 
..... दाग़ देहलवी..... 

Give something O barmaid! Thirst heat can't be stayed. 
If  you don't have wine, 
Give poison, that 'll be fine. 

साक़िया एक नज़र जाम से पहले पहले 
हम को जाना है कहीं शाम से पहले पहले..... अहमद फ़राज़..... 

O bar-maid! Give a look,
 before this drink I book. 
I have to go somewhere, before  evening is there. 

जुनूँ को होश कहाँ एहतिमाम-ए-ग़ारत का 
फ़साद जो भी जहाँ में हुआ ख़िरद से हुआ..... इक़बाल नदीम..... 

Frenzy just doesn't know, 
how do plunder 'n care go? 
In world for every brawl, 
it's always been brain' s call. 

कभी ख़िरद कभी दीवानगी ने लूट लिया 
तरह तरह से हमें ज़िंदगी ने लूट लिया 
..... हाफ़िज़ बनारसी..... 

At times looted by the mind, 
at times frenzy could find. 
I was plundered by life, 
in every way, every strife. 

पिला साक़िया मय-ए-जाँ पिला कि मैं लाऊँ फिर ख़बर-ए-जुनूँ 
ये ख़िरद की रात छटे कहीं नज़र आए फिर सहर-ए-जुनूँ 
..... नून. मीम. राशिद..... 

Serve life giving wine bar-girl, 
in frenzy again let me twirl. 
Let it be over, this mind night,
Let morn' of frenzy be in sight. 

जाने किस वक़्त कूच करना हो 
अपना सामान मुख़्तसर रखिए 
..... निकहत इफ़्तिख़ार..... 

You just don't know, 
when you have to go. 
Keep your luggage, 
a minimum baggage. 

'इंशा'-जी उठो अब कूच करो इस शहर में जी को लगाना क्या 
वहशी को सुकूँ से क्या मतलब जोगी का नगर में ठिकाना क्या 
..... इब्न-ए-इंशा..... 

'Insha ji' get up 'n proceed now, why love this city somehow ? 
What wild has to do with peace? 
What to dervish is a land piece? 

बहर-ए-हस्ती से कूच है दरपेश 
याद मंसूबा-ए-हुबाब रहे 
..... निज़ाम रामपुरी..... 

There's an ocean of life ahead. keep purpose of bubble in head

इंक़लाब आएगा रफ़्तार से मायूस न हो 
बहुत आहिस्ता नहीं है जो बहुत तेज़ नहीं 
..... अली सरदार जाफ़री..... 

Revolution 'll be, it's the need, don't be upset with the speed. Neither what is very slow, 
nor is very fast, at one go. 

ज़ालिम ने क्या निकाली रफ़्तार रफ़्ता रफ़्ता 
इस चाल पर चलेगी तलवार रफ़्ता रफ़्ता 
... दाग़ देहलवी..... 

What did tyrant invent?
 Speed slowly giving a vent. 
It's that, on this speed, 
Slowly 'll sword pay heed. 

राब्ता लाख सही क़ाफ़िला-सालार के साथ 
हम को चलना है मगर वक़्त की रफ़्तार के साथ..... क़तील शफ़ाई.... 

May be I have to abide, 
with the caravan guide. 
But I have the need to go,
 with tide of time on show. 

ये कैसा दश्त-ए-तहय्युर है याँ से कूच करो
यहाँ तो पाँव से रफ़्तार खींचता है कोई 
..... शाहिद कमाल..... 

What is this desert of wonder? Get up, let us go and wander. 
Here from  under our feet, 
someone pulls speed so neat. 

सब करिश्मात-ए-तसव्वुर हैं 'शकील' 
वर्ना आता है न जाता है कोई 

Imagination is a must. 
For a miracle to adjust. 
Shakeel there's none to come,
nor is a departure  by some. 

कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में 
कि हज़ारों सज्दे तड़प रहे हैं मिरी जबीन-ए-नियाज़ में.... अल्लामा इक़बाल..... 

Sometime manifest truth dear,
in latent apparel also appear. 
Thousand prayers long to be there, on my forehead in prayer.

अपने बाद हक़ीक़त या अफ़्साना छोड़ा था 
फूल खिले थे मैं ने जब वीराना छोड़ा था
..... उबैद सिद्दीक़ी..... 

Whether it was truth or tale,
that I had left as a trail. 
The flowers were in bloom, 
when I left desert in gloom. 











Thursday, 22 December 2022

REKHTA.. TODAY'S 5 +19 COUPLETS

चराग़ घर का हो महफ़िल का हो कि मंदिर का 
हवा के पास कोई मस्लहत नहीं होती 
..... वसीम बरेलवी.....

Lamp may be of gathering, temple or home,any kind. 
There's no business for the
 wind to have it in mind. 

इस आलम-ए-वीराँ में क्या अंजुमन-आराई 
दो रोज़ की महफ़िल है इक उम्र की तन्हाई..... सूफ़ी तबस्सुम..... 

This worldly desert and a group to throng! 
A meeting is of two days, alone life long. 

मोहब्बत करने वाले कम न होंगे 
तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे 
..... हफ़ीज़ होशियारपुरी..... 

Lovers won't be less in store.
In your group I will be no more. 

हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे 
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते 
..... राहत इन्दौरी..... 

Many travellers would have passed this way. 
Path stones could at least be swept away. 

मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी 
किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी 
..... बशीर बद्र..... 

You are a traveller and me too. 
Again at a turn, we 'll meet too. 

आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा 
कश्ती के मुसाफ़िर ने समुंदर नहीं देखा 
..... बशीर बद्र.....

Stayed in eyes, didn't get into heart. 
 Boat traveller never saw sea apart. 

पाँव में लिपटी हुई है सब के ज़ंजीर-ए-अना
सब मुसाफ़िर हैं यहाँ लेकिन सफ़र में कौन है.....तौसीफ़ तबस्सुम..... 

Chain of ego is around all
 feet. 
All are travellers, who is on feet? 

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा 
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा 
..... गुलज़ार..... 

This way, life was spent alone. 
With caravan, I travelled alone. 

अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो 
तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो..... मुनव्वर राना..... 

Let my parting journey be at ease. 
Don't disturb me in dreams please. 

किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल 
कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा 
..... अहमद फ़राज़..... 

Some found goal getting out of home. 
One like me, was life long on roam.

महरूमियों का अपनी न शिकवा हो क्यूँ हमें 
कुछ लोग पी के ही नहीं छलका के आए हैं..... रज़ा अमरोहवी..... 

Why on deprivation shouldn't I lament? 
Some not only drank, splashed content! 

इस महफ़िल-ए-कैफ़-ओ-मस्ती में इस अंजुमन-ए-इरफ़ानी में 
सब जाम-ब-कफ़ बैठे ही रहे हम पी भी गए छलका भी गए 
..... असरार - उल-हक़ मजाज़..... 

In this assembly of joy, in this enlightened group ploy. 
Others sat with cups in hand, I drank 'n overflowed grand. 

मैं ने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया 
इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए..... राहत इन्दौरी..... 

I spilled blood from my dry eyes to it. 
Sea was asking from me for water, a bit. 

तिरी आरज़ू तिरी जुस्तुजू में भटक रहा था गली गली 
मिरी दास्ताँ तिरी ज़ुल्फ़ है जो बिखर बिखर के सँवर गई..... बशीर बद्र..... 

In your search and desire, lane roaming was on fire. 
My story is your tress, it got disheveled to redress. 

अपने सर इक बला तो लेनी थी 
मैं ने वो ज़ुल्फ़ अपने सर ली है 
..... जौन एलिया..... 

One calamity was to be on the head. 
I took her meeting with me, instead. 

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक 
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक..... मिर्ज़ा ग़ालिब..... 

An age is needed to get effect of sigh. 
Who lives till meeting you is on a high. 

चूम लेती हैं कभी लब कभी आरिज़-ए-गुल
तूने ज़ुल्फ़ों को बहुत सर पे चढ़ा रक्खा है 

They kiss flowery cheeks, with lips they lock. 
Your tresses are really nasty, heady stock. 

उस ज़ुल्फ़ की तौसीफ़ बताई नहीं जाती
इक लंबी कहानी है सुनाई नहीं जाती 
..... जिगर जालंधरी..... 

Her tress has such a lot to 
 admire
You can't recite this  tale, entire. 

ऐ सालिक इंतिज़ार-ए-हज में क्या तू हक्का-बक्का है 
बगूले सा तो कर ले तौफ़ दिल पहलू में मक्का है..... वली उज़लत..... 

Awaiting haj, 'n confounded O traveller on your part? 
Perambulate as an air whorl, Mecca is aside heart. 

ये साबित है कि मुतलक़ का तअय्युन हो नहीं सकता 
वो सालिक ही नहीं जो चल के ता-दैर-ओ-हरम ठहरे..... हबीब मूसवी

It's proved that no one can
 ever fix the absolute.
O soofi ! Way to mosque 'n temple isn't resolute.

सालिक है गरचे सैर-ए-मक़ामात-ए-दिल-फ़रेब 
जो रुक गए यहाँ वो मक़ाम-ए-ख़तर में हैं 
..... पंडित जवाहर नाथ साक़ी..... 

O soofi ! Though journey of places is full of deceit. 
Those who stay here may
 well  face goal defeat. 

मैं सहरा जा के क़ब्र-ए-हज़रत-ए-मजनूँ को देखा था 
ज़ियारत करते थे आहू बगूला तौफ़ करता था..... वली उज़लत..... 

I had been to desert, visited Majnu's tomb dear. 
Perambulating were storms, 
 devotees were deer. 

नश्शा-ए-रंग से है वाशुद-ए-गुल 
मस्त कब बंद-ए-क़बा बाँधते हैं
..... मिर्ज़ा ग़ालिब..... 

Intoxicating colours make buds undress. 
When do the lunatics tie knots of dress? 

इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर आ सको तो आओ
मेरे घर के रास्ते में कोई कहकशां नहीं है 

Walk over these stones, if you can O cute! 
There's no milky-way  in my home route. 
















Wednesday, 21 December 2022

SHAHARYAAR.. GHAZAL.. DIL MEN RAKHTAA HAI NA PALKON PE BITHAATAA HAI MUJHE.....

दिल में रखता है न पलकों पे बिठाता है मुझे 
फिर भी इक शख़्स में क्या क्या नज़र आता है मुझे 

Neither in heart nor on eyes does he steer me. 
Even then in a person, what does appear, see. 

रात का वक़्त है सूरज है मिरा राह-नुमा 
देर से दूर से ये कौन बुलाता है मुझे 

It's night time and my guide is the sun. 
From far, very far, who is calling dear me. 

मेरी इन आँखों को ख़्वाबों से पशेमानी है 
नींद के नाम से जो हौल सा आता है मुझे 

These eyes of mine are ashamed of dreams. 
In the name of sleep,  fear is near me. 

तेरा मुंकिर नहीं ऐ वक़्त मगर देखना है 
बिछड़े लोगों से कहाँ कैसे मिलाता है मुझे 

I don't believe you O time, but want to see 
How, long lost people, can you bring near me? 

क़िस्सा-ए-दर्द में ये बात कहाँ से आई 
मैं बहुत हँसता हूँ जब कोई सुनाता है मुझे

Where from did it get into my grief lore?
I laugh when someone makes hear me. 

REKHTA.. TODAY'S 5 +12 COUPLETS.....

ख़ता किस की है तुम ही वक़्त के बाहर रहे 'शाहीं'
तुम्हें आवाज़ देने एक लम्हा दूर तक आया..... जावेद शाहीन.....

 Whose is the fault 'Shaheen', you were out of time.
A moment came to call after  you for a long time.

आप आए हैं हाल पूछा है
हम ने ऐसे भी ख़्वाब देखे हैं 
..... एजाज़ वारसी.....

You have come, asked 
my welfare.
At such dreams, me too 
 can stare. 

अक़्ल में यूँ तो नहीं कोई कमी 
इक ज़रा दीवानगी दरकार है 
... फ़िराक़ गोरखपुरी.....

There is no shortage in this mind. 
What's needed, is frenzy of a kind. 

ज़िंदगी जब्र है और जब्र के आसार नहीं 
हाए इस क़ैद को ज़ंजीर भी दरकार नहीं 
..... फ़ानी बदायूनी..... 

Life is a torture without any sign. 
Wow! this jail needs no chain  alien. 

देवताओं का ख़ुदा से होगा काम 
आदमी को आदमी दरकार है 
..... फ़िराक़ गोरखपुरी..... 

Gods might be in Almighty's need. 
Humans have only human's need. 

हम को भी सर कोई दरकार है अब सर के एवज़
पत्थर इक हम भी चला देते हैं पत्थर के एवज़..... कर्रार नूरी.....

I also need a head in exchange of mine. 
I also throw stone in exchange of thine. 

अतवार उस के देख के आता नहीं यक़ीं 
इंसाँ सुना गया है कि आफ़ाक़ में रहा 
..... एजाज़ गुल..... 

Seeing his conduct, it's so hard to  believe. 
Man is heard to be in horizons to  perceive. 

इश्क़ को हुस्न के अतवार से क्या निस्बत है 
वो हमें भूल गए हम तो उन्हें याद करें 
..... अबु मोहम्मद सहर..... 

How is love related with conduct of beauty? 
She forgot me, but I 
remember her as duty. 

किसी सूरत से हुई कम न हमारी तशवीश 
जब बढ़ी दिल से तो आफ़ाक़ में फैली तशवीश..... हबीब मूसवी..... 

In no way could  be reduced my fear. 
From heart, it touched horizon O dear!

कौन हैं वो जिन्हें आफ़ाक़ की वुसअत कम है 
ये समुंदर न ये दरिया न ये सहरा मेरा 
..... अशफ़ाक़ हुसैन..... 

Who are those that feel extent of horizon is less? 
The ocean, stream, desert aren't mine to progress. 

मेरी ख़ामोशियों में लर्ज़ां है 
मेरे नालों की गुम-शुदा आवाज़ 
..... फ़ैज़ अहमद फ़ैज़.....

It's trembling in my silence.
The wails of my past tense. 

आवाज़ दे के देख लो शायद वो मिल ही जाए 
वर्ना ये उम्र भर का सफ़र राएगाँ तो है 
..... मुनीर नियाज़ी.....

May be, he can be found, just give a call. 
Otherwise life tour is a waste after all. 

इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं 
होंटों पे लतीफ़े हैं आवाज़ में छाले हैं 
..... जावेद अख्तर.....

In this city,the styles of living 
are strange. 
Jokes on lips 'n blisters on tongue is the range. 

देते फिरते थे हसीनों की गली में आवाज़
कभी आईना-फ़रोश-ए-दिल-ए-हैराँ हम थे ..... तअश्शुक़ लखनवी.....

I used to roam in lover's lanes giving call. 
I was mirror seller of wondering heart after all.

जब ग़ुंचे को वाशुद हुई तहरीक सबा से 
बुलबुल से अजब क्या जो करे नग़्मा-सराई ..... इस्माइल मेरठी.....

When the bud opened by movement of breeze.
What's strange if nightingale sings melodies?

न लुटता दिन को तो कब रात को यूँ बे-ख़बर सोता
रहा खटका न चोरी का दुआ देता हूँ रहज़न को..... मिर्ज़ा ग़ालिब..... 

Having been looted in the day, am carefree to sleep as I can. 
Nothing is left for the theft, well, thanks to the highwayman

सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता 
निकलता आ रहा है आफ़्ताब आहिस्ता आहिस्ता..... अमीर मीनाई.....

Veil slides from her face, ever so slowly. 
You watch the sun's pace, ever so slowly. 

सर्दी पर चुने हुए अश'आर.....

अब उदास फिरते हो सर्दियों की शामों में 
इस तरह तो होता है इस तरह के कामों में
..... शोएब बिन अज़ीज़..... 
 
Now that one grieves, in these winter eves'. 
This is what happens, in works like these. 
  
सर्दी में दिन सर्द मिला 
हर मौसम बेदर्द मिला 
.....मोहम्मद अल्वी.....
 
When it's chilly, she is cold. 
Every weather is painless, bold
  
दिसम्बर की सर्दी है उस के ही जैसी 
ज़रा सा जो छू ले बदन काँपता है 
..... अमित शर्मा मीत..... 
 
December month chill , 
is just like her, still. 
Body trembles as such,
 with a little touch. 
  
गर्मी लगी तो ख़ुद से अलग हो के सो गए 
सर्दी लगी तो ख़ुद को दोबारा पहन लिया
..... बेदिल हैदरी..... 
 
When I felt it was warm, parted with self, slept in form. 
When I felt it was cold, wore myself again for hold. 
  
लगी रहती है अश्कों की झड़ी गर्मी हो सर्दी हो 
नहीं रुकती कभी बरसात जब से तुम नहीं आए..... अनवर शऊर..... 

Whether it's warm or it's cold, stream of tears aren't on hold. 
This rain has never stopped,  since I have been dropped. 
 
सर्दी और गर्मी के उज़्र नहीं चलते 
मौसम देख के साहब इश्क़ नहीं होता 
..... मुईन शादाब..... 
 
Whether it's warm or cold, these excuses don't hold. 
Saheb looking at the weather,
 love can't wait to be together. 
 
जो दे सका न पहाड़ों को बर्फ़ की चादर 
वो मेरी बाँझ ज़मीं को कपास क्या देगा
..... मोहसिन नक़वी..... 
 
One who couldn't give mountains, a sheet of snow. 
On my sterile land, how 'd it
 could  make cotton grow? 
  
उस के लहजे में बर्फ़ थी लेकिन 
छू के देखा तो हाथ जलने लगे
..... अमजद इस्लाम अमजद..... 
 
 Though there was ice in her  style. 
A little touch 'n hands burned awhile. 
  
कभी तो सर्द लगा दोपहर का सूरज भी 
कभी बदन के लिए इक किरन ज़ियादा हुई ..... नसीम सहर..... 
 
At times, mid day sun too, felt cold. 
Or a ray was more than body 'd hold. 
  
तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे 
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम 
..... नोमान शौक़..... 

You are that lovely winter sun face. 
I keep looking from the walls retrace. 
 
सख़्त सर्दी में ठिठुरती है बहुत रूह मिरी 
जिस्म-ए-यार आ कि बेचारी को सहारा मिल जाए ..... फ़रहत एहसास..... 
 
My soul shivers in intense cold
O lover's body! Come for a hold
 
तेज़ धूप में आई ऐसी लहर सर्दी की 
मोम का हर इक पुतला बच गया पिघलने से ..... क़तील शफ़ाई..... 

In intense sun, a wave of cold was felt 
Or each wax statue would have melt. 
 
इक बर्फ़ सी जमी रहे दीवार-ओ-बाम पर 
इक आग मेरे कमरे के अंदर लगी रहे 
..... सालिम सलीम..... 

Let something icy be there on walls and door. 
While fire should keep igniting  my indoor. 
 
अब की सर्दी में कहाँ है वो अलाव सीना 
अब की सर्दी में मुझे ख़ुद को जलाना होगा..... नईम सरमद..... 

Where is that hot chest in this winter? 
I have to burn myself in  this winter. 
 
इतनी सर्दी है कि मैं बाँहों की हरारत माँगूँ 
रुत ये मौज़ूँ है कहाँ घर से निकलने के लिए ..... ज़ुबैर फ़ारूक़..... 

It's so intense cold, I ask for your arms to hold. 
It's not the weather, to get out of home  either. 
 
सर्दी है कि इस जिस्म से फिर भी नहीं जाती 
सूरज है कि मुद्दत से मिरे सर पर खड़ा है 
..... फख्र ज़मान..... 

How much is the cold, keeps body in it's hold. 
Since long on my head, though is sun instead. 

ऐसी सर्दी में शर्त चादर है 
ओढ़ने की हो या बिछौने की 
..... पारस मज़ारी..... 

In this winter, a sheet is
 surely needed . 
As a cover or someone 
to be seeded. 
 
इस बार इंतिज़ाम तो सर्दी का हो गया 
क्या हाल पेड़ कटते ही बस्ती का हो गया 
..... नोमान शौक़..... 
 
 This winter could be taken care of. 
What about area, with tree
 cut off? 
  
ये सर्दियों का उदास मौसम कि धड़कनें बर्फ़ हो गई हैं 
जब उन की यख़-बस्तगी परखना तमाज़तें भी शुमार करना..... नोशी गिलानी..... 
 
This sad winter so cold, frozen are heart throbs bold. 
Now assess her frozen hold, include the passions gold. 
  
शाम ने बर्फ़ पहन रक्खी थी रौशनियाँ भी ठंडी थीं 
मैं इस ठंडक से घबरा कर अपनी आग में जलने लगा..... शमीम हनफ़ी..... 

 Evening had put on ice, lights were cold, not nice. 
Upset with this cold, I burnt in my own fire bold. 
 
अब उस मक़ाम पे है मौसमों का सर्द मिज़ाज 
कि दिल सुलगने लगे और दिमाग़ जलने लगे..... फ़रहान सालिम..... 
 
At such a peak is mood of 
cold weather. 
Hearts and the minds are
 on fire either . 
 
सूरज चढ़ा तो पिघली  चोटियों की बर्फ़ 
आँधी चली तो उखड़े बहुत साया-दार लोग ..... मंज़र सलीम.....

With the rising sun melted snow of mountain peaks. 
With the storm were uprooted 
 many shadowy meeks. 

Tuesday, 20 December 2022

SAHIR LUDHIANAVI.. COUPLETS.....

तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही 
तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ 

It's a pleasure when we meet. 
But I am sad after the meet. 

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से 
चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से 

I have seen  life from so
 near. 
Strange do all the faces appear. 

ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ
मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया 

Where you feel no difference between pleasure and pain. 
I keep bringing the heart at 
that site again and again.  
  
तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम 
ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम 

I am so upset with dilemmas of life. 
May be, I waive the world in strife. 
 
ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है 
क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम 

Only eyes are what's left with me. 
Why world with other's eyes 'd 
I see?
  
अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं 
तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी 

I don't grieve about my ruins at all. 
You are faithful to someone O pal ! 
 
हम ग़म-ज़दा हैं लाएँ कहाँ से ख़ुशी के गीत 
देंगे वही जो पाएँगे इस ज़िंदगी से हम 

I am aggrieved, where from to get joy song. 
I will return only what I have 
got all along. 

चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ 
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ 

Picking pleasure buds in brief, for long I am in grief. 
It's a pleasure when we meet, but I am sad after the meet. 

दुनिया ने तजरबात ओ हवादिस की शक्ल में 
जो कुछ मुझे दिया है वो लौटा रहा हूँ मैं 

As experience 'n crisis that world gave me
Whatever it has given, I am  returning thee. 

तू मुझे छोड़ के ठुकरा के भी जा सकती है 
तेरे हाथों में मिरे हाथ हैं ज़ंजीर नहीं 

You may leave or boot me aside the fold. 
Not chains but my hands are there to hold. 

इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर 
हम ग़रीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मज़ाक़ 

Taking support of wealth  one king. 
Made fun of love of poor! No  thing. 

अभी ज़िंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ख़ल्वत में 
कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैं ने 

I am alive but keep thinking in solitude. 
With help of which desire did live this dude. 

हम जुर्म-ए-मोहब्बत की सज़ा पाएँगे तन्हा 
जो तुझ से हुई हो वो ख़ता साथ लिए जा 

Let me be punished for crime of love alone. 
Take with you, what mistakes you  atone. 

बस अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदो 
बहुत दुख सह लिए मैं ने बहुत दिन जी लिया मैं ने 

Now spare hem of my heart O useless hopes. 
I have tolerated griefs 'n lived without scopes. 

मोहब्बत तर्क की मैं ने गरेबाँ सी लिया मैं ने 
ज़माने अब तो ख़ुश हो ज़हर ये भी पी लिया मैं ने 

I have left love and stitched my tattered garb. 
Be happy O world ! This poison I could absorb. 

ऐ ग़म-ए-दुनिया तुझे क्या इल्म तेरे वास्ते 
किन बहानों से तबीअ'त राह पर लाई गई 

You aren't aware O world pain for your plight! 
Which excuses could set my own state right? 


अँधेरी शब में भी तामीर-ए-आशियाँ न रुके 
नहीं चराग़ तो क्या बर्क़ तो चमकती है 

Even if it's a pitch dark night,
don't stop making nest to alight
What if lamp isn't there, 
electric spark' ll share. 

इस रेंगती हयात का कब तक उठाएँ बार 
बीमार अब उलझने लगे हैं तबीब से 

How long to bear weight of this life that crawls? 
The patient and doctor are entangled in brawls. 
  
इस तरह निगाहें मत फेरो, ऐसा न हो धड़कन रुक जाए 
सीने में कोई पत्थर तो नहीं एहसास का मारा, दिल ही तो है 

This way don't avert glance, heart throb may stop by chance. 
In chest there is no stone, 
just a heart, feeling prone. 

बहुत घुटन है कोई सूरत-ए-बयाँ निकले 
अगर सदा न उठे कम से कम फ़ुग़ाँ निकले 

I feel suffocated, let something be said. 
If no sound echo, let wail be instead. 

चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है आँखों में सुरूर आ जाता है 
जब तुम मुझे अपना कहते हो अपने पे गुरूर आ जाता है 

Joy spreads all over the face, eyes get intoxicated in place. 
When you call me your own,
I feel so proud of my own. 

बुझा दिए हैं ख़ुद अपने हाथों मोहब्बत के दिए जला के
मेरी वफ़ा ने उजाड़ दी हैं उम्मीद की बस्तियाँ बसा के

Lamps that were love prone,
 I put out on my own. 
My faith ruined, could not cope, 
with hutments of the hope. 

कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त 
सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया 

O friend! Who weeps for some one? 
All weep for their own and none. 



REKHTA.. TODAY'S 5 COUPLETS

दर-हक़ीक़त इत्तिसाल-ए-जिस्म-ओ-जाँ है ज़िंदगी 
ये हक़ीक़त है कि अर्बाब-ए-हिमम के वास्ते ..... आतिश बहावलपुरी.....

Really, life is conjunction between body and soul. 
But it's for those who are 
 courageous as a whole. 

क्या क्या पुकारें सिसकती देखीं लफ़्ज़ों के ज़िंदानों में 
चुप ही की तल्क़ीन करे है ग़ैरत-मंद ज़मीर हमें..... मुख्तार  सिद्दीक़ी.....

You listen to many sobs in the word's cage.
Poor conscience educates to be silent 'n age. 

Monday, 19 December 2022

REKHTA.. TODAY'S 5 +7 COUPLETS..

ज़ौक़ जो मदरसे के बिगड़े हुए हैं मुल्ला
उन को मय-ख़ाने में ले आओ सँवर जाएँगे
..... शैख़ इब्राहिम ज़ौक़....

' Zauq'! Those persons spoilt in mosque, O priest ! 
Bring them to tavern, 'll get rectified at least. 

मुल्ला की दौड़ जैसे है मस्जिद तलक 'नसीर' 
है मस्त की भी ख़ाना-ए-ख़ु़म्मार तक पहुँच..... शाह नसीर..... 

O' Naseer' as the priest has mosque within reach. 
The frenzied has pots of the  tavern within reach. 

अक़्ल अय्यार है सौ भेस बदल लेती है 
इश्क़ बेचारा न ज़ाहिद है न मुल्ला न हकीम..... अल्लामा इक़बाल..... 

The wisdom is a detective, who takes many a shape. 
Poor love is neither priest, nor teacher, curer to escape. 

आरज़ू हसरत और उम्मीद शिकायत आँसू 
इक तिरा ज़िक्र था और बीच में क्या क्या निकला..... सरवर आलम राज़....

Desire, longing, complaint, tears and hope. 
Referring to you, I had so
 much to cope. 

कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं
क्या सितम है कि हम लोग मर जाएँगे
..... जौन एलिया.....

How attractive are you, how pacifier am I? 
What a calamity that both of 
us would die ! 

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद 
अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद..... जिगर मुरादाबादी.....

Neither world cruelty, nor my loyalty do I recollect. 
But for love, there's nothing in my memory to react. 

क्या सितम है कि अब तिरी सूरत 
ग़ौर करने पे याद आती है
... जौन एलिया..... 

What a pity that now even
 your face. 
Only  thinking about deep, 
can I trace. 

सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं 
और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं 
..... जौन एलिया..... 

All griefs of world are mine. 
And it's sad that I am thine. 

ये सवाद-ए-शहर और ऐसा कहाँ हुस्न-ए-मलीह 
शश-जिहत में मुल्क देखा ही नहीं पंजाब सा..... जुरअत क़लंदर बख़्श..... 

This environment of city, where is such wheatish beauty ? 
In six facets of this place, nothing like Punjab you can trace. 

ख़ंजर चमका रात का सीना चाक हुआ 
जंगल जंगल सन्नाटा सफ़्फ़ाक हुआ
..... ज़ेब गौरी..... 

As dagger shone, torn open was the night chest. 
Through out jungle, silence
 was clear, at it's best. 

जैसे बारिश से धुले सेहन-ए-गुलिस्ताँ 'अमजद' 
आँख जब ख़ुश्क हुई और भी चेहरा चमका
..... अमजद अल्लाह अमजद..... 

O'Amjad'! As the garden compound is washed by rain. 
When eyes finally dried, shone glow of face to retain. 

लहू से मैं ने लिखा था जो कुछ दीवार-ए-ज़िंदाँ पर 
वो बिजली बन के चमका दामन-ए-सुब्ह-ए-गुलिस्ताँ पर 
..... सीमाब अकबराबादी..... 

What I had written with my own blood on the prison wall. 
Shone as electric spark on hem of garden with morn' fall. 





Sunday, 18 December 2022

COUPLETS ON MOON

उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा 
आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा 
..... इफ़्तिख़ार नसीम..... 

It appeared so dull, compared with her bright face. 
Though the moon was full, but looked half in place. 
 
कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा 
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिरा ..... इब्न-ए-इंशा..... 

 It was fourteenth yesternight, 
we talked about you all night. 
Some said, moon was in place others in it, traced your  face. 
 
ईद का चाँद तुम ने देख लिया 
चाँद की ईद हो गई होगी 
..... इदरीस आज़ाद..... 

You saw moon on Eid. 
Moon has had it's Eid. 
 
हर एक रात को महताब देखने के लिए 
मैं जागता हूँ तिरा ख़्वाब देखने के लिए 
..... अज़हर इनायती..... 

On every night, to have moon in sight. 
Awake I keep, to dream you in sleep. 
 
वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा 
तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से मैं 
..... फ़रहत एहसास..... 

I 'll appear tonight, so said that moon. 
I am waiting since eve, is it so soon? 

चाँद से तुझ को जो दे निस्बत सो बे-इंसाफ़ है 
चाँद के मुँह पर हैं छाईं तेरा मुखड़ा साफ़ है ..... शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम..... 

One who does compare, moon with you is unfair. 
A  shadow does moon bear, but your face is clear. 
 
पाँव साकित हो गए 'सरवत' किसी को देख कर 
इक कशिश महताब जैसी चेहरा-ए-दिलबर में थी ..... सरवत हुसैन..... 

O 'Sarvat'! Looking at someone, feet couldn't move a step. 
A moon like attraction was in beloved's face, her get up. 
 
मुझ को मालूम है महबूब-परस्ती का अज़ाब 
देर से चाँद निकलना भी ग़लत लगता है 
..... अहमद कमाल परवाज़ी ..... 

Calamity of lover worship, 
I am well aware. 
It looks bad, when in time moon isn't there. 
 
कई चाँद थे सर-ए-आसमाँ कि चमक चमक के पलट गए 
न लहू मिरे ही जिगर में था न तुम्हारी ज़ुल्फ़ सियाह थी....अहमद मुश्ताक़..... 

Several moons were in the sky, shone well and said goodbye. 
Neither blood was in my chest, nor was your dark tress at best
 
लुत्फ़-ए-शब-ए-मह ऐ दिल उस दम मुझे हासिल हो 
इक चाँद बग़ल में हो इक चाँद मुक़ाबिल हो ..... मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस..... 

O heart! I'd then have charm of moon night. 
A moon by my side and a moon in the sight. 

चाँद में तू नज़र आया था मुझे 
मैं ने महताब नहीं देखा था 
..... अब्दुर्रहमान मोमिन..... 

Within moon, you came to view
I didn't see moon, I saw you. 
 
ये किस ज़ोहरा-जबीं की अंजुमन में आमद आमद है 
बिछाया है क़मर ने चाँदनी का फ़र्श महफ़िल में 
..... सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम..... 

Which Venus face is to be received with such grace? 
Moon has floored moonlight
 for the meeting in place. 
  
रुस्वा करेगी देख के दुनिया मुझे 'क़मर' 
इस चाँदनी में उन को बुलाने को जाए कौन ..... क़मर जलालवी..... 

O'Qamar'! Seeing her world 'd humiliate me
In moonlight, who' d go to call her, just see. 
 
देखा हिलाल-ए-ईद तो तुम याद आ गए 
इस महवियत में ईद हमारी गुज़र गई 
..... अज्ञात..... 

Seeing crescent of Eid, you came to my mind. 
So absorbed in your thoughts, spent Eid of a kind. 

हम ने उस चेहरे को बाँधा नहीं महताब-मिसाल 
हम ने महताब को उस रुख़ के मुमासिल बाँधा
..... इफ़्तिख़ार मुग़ल.....

I didn't liken her face with the moon. 
Almost similar to her face, was moon. 

REKHTA.. TODAY'S 5 +2 COUPLETS

ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझ
हम अपने शहर में होते तो घर गए होते
..... उम्मीद फ़ाज़ली.....

This cold night, sleep loaded eyes, a desire to roam. 
Had I been in my city, would  have gone to home.

इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से तेरी सूरत 
लोग तुझको के मिरा महबूब समझते होंगे..... बशीर बद्र.....

So similar to my ghazals is your face. 
In you, people as my lover, 
can trace.

मत पोंछ अबरू-ए-अरक़-आलूद हाथ से
लाज़िम है एहतियात कि हैआब-दार तेग़
..... मीर हसन.....

Don't wipe perspiring brows with your hand. 
The sword is polished, you should understand.

ऐ सनम जिस ने तुझे चाँद सी सूरत दी है 
उसी अल्लाह ने मुझ को भी मोहब्बत दी है..... हैदर अली आतिश.....

My love! One who gave you this moon like face.
I have also been accorded love by His grace.

तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सा
मुझ को ग़ुस्से पे प्यार आता है
..... अमीर मीनाई..... 

You are angry with my love. 
Your anger is what I  love.

रिआ'यत चाहिए ऐसी कि ज़ेबाई हो मा'नी की 
उरूस-ए-शेर का ऐ 'बहर' ज़ेवर हो तो ऐसा हो..... इमदाद अली बहर.....

That meaning is beautiful, concession should be such.
O 'Bahar'! Bride of couplet needs be ornamented much.


Saturday, 17 December 2022

REKHTA.. TODAY'S 5 +25 COUPLETS

किनारे ही से तूफ़ाँ का तमाशा देखने वाले 
किनारे से कभी अंदाज़ा-ए-तूफ़ाँ नहीं होता..... जगन्नाथ आज़ाद.....

Those who watch the storm, from the shore as a norm. 
They can never  guess,
 or gale force assess. 

ऐ मौज-ए-बला उन को भी ज़रा दो चार थपेड़े हल्के से 
कुछ लोग अभी तक साहिल से तूफ़ाँ का नज़ारा करते हैं..... जज़्बी.....

O calamitous waves ! A few shoves to the naives. 
Still some people on shore, 
get a view of storm on roar. 

बचा लिया मुझे तूफ़ाँ की मौज ने वर्ना 
किनारे वाले सफ़ीना मिरा डुबो देते 
..... मजरूह सुल्तानपुरी..... 

By the stormy wave, I got a close save. 
Or else people on the shore, 'd sink my boat to core. 

एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो 
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो 
...... राहत इन्दौरी..... 

These are two sides of the same river, friends. 
With life as well as death, behave like friends. 

कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं 
नाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है..... अमीर मीनाई..... 

Boat of everyone reaches the shore. 
In absence of boatsman, God holds oar. 

भँवर से लड़ो तुंद लहरों से उलझो 
कहाँ तक चलोगे किनारे किनारे 
..... रज़ा हमदानी..... 

Fight whorl, get involved with strong waves. 
How long will you be on shore's close saves. 

शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है 
जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है 
..... बशीर बद्र..... 

The pinnacle of fame, is a moment 's show game. 
The branch on which you sit,  can shatter in a little bit. 

आईना क्यूँ न दें कि तमाशा कहें जिसे
ऐसा कहाँ से लाऊँ कि तुझ सा कहें जिसे
..... मिर्ज़ा ग़ालिब..... 

Why not give a mirror and call the show. 
Where from will I get one like you to go? 

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे 
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे 
..... मिर्ज़ा ग़ालिब..... 

The world is a children 's playground before me. 
Day 'n night the spectacle is found before me. 

एक मुद्दत से मिरी माँ नहीं सोई 'ताबिश' 
मैं ने इक बार कहा था मुझे डर लगता है 
..... अहसान ताबिश..... 

' Taabish' ! Since long, my mom didn't get sleep. 
I had said just once, I am afraid and can weep. 

मुद्दत के बा'द उस ने जो की लुत्फ़ की निगाह 
जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़े..... कैफ़ी आज़मी..... 

A pleasant glimpse oblong, when passed after so long. 
So pleased was the heart,
 tears trickled on my part. 

कोई नाम-ओ-निशाँ पूछे तो ऐ क़ासिद बता देना 
तख़ल्लुस 'दाग़' है वो आशिक़ों के दिल में रहते हैं..... दाग़ देहलवी..... 

If one asks my name and site,O envoy! You so alight. 
'Daagh' is my pen name, on lover's heart is my claim. 

आती है बात बात मुझे बार बार याद 
कहता हूँ दौड़ दौड़ के क़ासिद से राह में 
...... दाग़ देहलवी..... 

I recollect times and again, what I wanted to say as main. 
I run and tell the envoy,   messages on way to the coy. 

क़ासिद के आते आते ख़त इक और लिख रखूँ 
मैं जानता हूँ जो वो लिखेंगे जवाब में 
..... मिर्ज़ा ग़ालिब..... 

Before messanger comes back, one more letter on the track. 
I have knowledge sound, what 
will be as answer found? 

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में 
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में 
..... गुलज़ार..... 

Fragrant people  were met with in the tale/on trail. 
Unknowingly, I had opened  old mail. 

क्या जाने क्या लिखा था उसे इज़्तिराब में 
क़ासिद की लाश आई है ख़त के जवाब में..... मोमिन ख़ान मोमिन..... 

I know not what was written to her in time dis-eased
Sent as an answer to letter was messanger deceased. 

उन्हें अपने दिल की ख़बरें मिरे दिल से मिल रही हैं 
मैं जो उन से रूठ जाऊँ तो पयाम तक न पहुँचे .... शकील बदायूनी.....

She is getting messages of her heart, as conveyed by my heart
If I get angry with her from now on, no message would have gone. 

क़ासिद नहीं ये काम तिरा अपनी राह ले 
उस का पयाम दिल के सिवा कौन ला सके..... ख़्वाजा मीर दर्द..... 

O envoy it's not your job, go your own way O snob! 
Her message but for heart, 
who can from her impart? 

वादा नहीं पयाम नहीं गुफ़्तुगू नहीं 
हैरत है ऐ ख़ुदा मुझे क्यूँ इंतिज़ार है 
..... लाला माधव राम जौहर..... 

Neither promise nor message, not a talk in the passage. 
It surprises me O Lord! Why I wait on self accord? 

एक मुद्दत से न क़ासिद है न ख़त है न पयाम
अपने वादे को तो कर याद  मुझे याद  न कर..... जलाल मानिकपुरी..... 

No envoy no letter, no message, what's the matter? 
Remember promise of your own, if to me you disown. 

रिहा कर दे क़फ़स की क़ैद से घायल परिंदे को 
किसी के दर्द को इस दिल में कितने साल पालेगा..... एतबार साजिद..... 

Release the wounded bird from confines of jail absurd. 
How long will you sustain, in your heart someone 's pain? 

नहीं इस खुली फ़ज़ा में कोई गोशा-ए-फ़राग़त 
ये जहाँ अजब जहाँ है न क़फ़स न आशियाना..... अल्लामा इक़बाल..... 

In this open atmosphere, no place for leisure is there. 
This world is a strange place, neither jail nor garden to trace. 

बुलबुल को बाग़बाँ से न सय्याद से गिला 
क़िस्मत में क़ैद लिक्खी थी फ़स्ल-ए-बहार में..... बहादुर शाह ज़फ़र.....

Neither with gardener nor hunter laments nightingale. 
In this spring time, it was destined to be in jail ! 

ज़ब्त करता हूँ तो घुटता है क़फ़स में मिरा दम 
आह करता हूँ तो सय्याद ख़फ़ा होता है 
..... क़मर जलालवी..... 

If I try to tolerate, prison will suffocate. 
And if I utter a sigh, huntsman asks why? 

गए दिनों का सुराग़ ले कर किधर से आया किधर गया वो 
अजीब मानूस अजनबी था मुझे तो हैरान कर गया वो ..... नासिर काज़मी..... 

Finding traces of gone by days, where from he came and left which ways? 
Strange, so used that stranger was, he left me surprised with  no cause. 

मानूस हो चला था तसल्ली से हाल-ए-दिल 
फिर तू ने याद आ के ब-दस्तूर कर दिया 
..... हसरत मोहानी..... 

So used to solace had been  state of heart. 
Your memory came and set back each part. 

इतना मानूस हूँ सन्नाटे से 
कोई बोले तो बुरा लगता है 
..... अहमद नदीम क़ासमी..... 

So well versed am I with the silence. 
Anyone' s voice makes me  tense. 

आशियाँ लुट गया गुलिस्ताँ जल गया अब क़फ़स से निकल कर किधर जाएँगे 
इतने मानूस सैयाद से हो गए अब रिहाई मिलेगी तो मर जाएँगे 
..... राज़ इलाहाबादी..... 

Garden was on fire, looted home entire, now out of jail, where will be the trail?
With captivator now I am so much used, if set outside, life will be refused. 

बस एक शाम का हर शाम इंतजार रहा
मगर वो शाम किसी शाम भी नहीं आई
..... अजमल सिराज..... 

Only for an evening  did I wait. 
But that eve' wasn't in my fate. 


इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब' 
जो लगाए न लगे और बुझाए न बने 

Love isn't under control, Ghalib this passion is on roll. 
Neither can you set it on, nor can you let it be gone. 


















Friday, 16 December 2022

JOHN ELIA.. COUPLETS.....

क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में 

जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं 


हाँ ठीक है मैं अपनी अना का मरीज़ हूँ 

आख़िर मिरे मिज़ाज में क्यूँ दख़्ल दे कोई 


बोलते क्यूँ नहीं मिरे हक़ में 

आबले पड़ गए ज़बान में क्या 


अपने सभी गिले बजा पर है यही कि दिलरुबा 

मेरा तिरा मोआ'मला इश्क़ के बस का था नहीं 


कुछ तो रिश्ता है तुम से कम-बख़्तों 

कुछ नहीं कोई बद-दुआ' भेजो 

  
इक शख़्स कर रहा है अभी तक वफ़ा का ज़िक्र 

काश उस ज़बाँ-दराज़ का मुँह नोच ले कोई 
 
  
मुझे ग़रज़ है मिरी जान ग़ुल मचाने से 

न तेरे आने से मतलब न तेरे जाने से
 
  
सीना दहक रहा हो तो क्या चुप रहे कोई 

क्यूँ चीख़ चीख़ कर न गला छील ले कोई


मैं अब हर शख़्स से उक्ता चुका हूँ 

फ़क़त कुछ दोस्त हैं और दोस्त भी क्या 

 
 
 
तुझ को ख़बर नहीं कि तिरा कर्ब देख कर 

अक्सर तिरा मज़ाक़ उड़ाता रहा हूँ मैं 
 
 
  
सोचा है कि अब कार-ए-मसीहा न करेंगे 

वो ख़ून भी थूकेगा तो पर्वा न करेंगे 


हम तिरा हिज्र मनाने के लिए निकले हैं 

शहर में आग लगाने के लिए निकले हैं 

  
मोहज़्ज़ब आदमी पतलून के बटन तो लगा 

कि इर्तिक़ा है इबारत बटन लगाने से 


 
 
  
दिल अब दुनिया पे ला'नत कर कि इस की 

बहुत ख़िदमत-गुज़ारी हो गई है 

बहकना चाहो तो बहको, संभलना चाहो तो सम्भलो
मैं अपने मैकदे में हर तरह का जाम रखता हूँ
अजमल सिद्दीक़ी

उसके नुक्ते भी सुनो, दुःख भी निहारो उसके
अहल-ए-दिल तुम भी चलो अहल-ए-नज़र तुम भी चलो
अजमल सिद्दीक़ी
 
 
  
मेरे तेवर बुझ गए मेरी निगाहें जल गई 

अब कोई आईना-रू आईना-दार आया तो क्या 








REKHTA.. TODAY'S 5 +14 COUPLETS

तवाज़ो का तरीक़ा साहिबो पूछो सुराही से 
कि जारी फ़ैज़ भी है और झुकी जाती है गर्दन भी....शैख़ इब्राहिम ज़ौक़..... 

From goblet, gentlemen! Way of humility you can trace. 
The neck is bent while it's on move with a grace. 

उन्हीं के फ़ैज़ से बाज़ार-ए-अक़्ल रौशन है 
जो गाह गाह जुनूँ इख़्तियार करते रहे 
..... फ़ैज़ अहमद फ़ैज़..... 

It's his capacity that mart of intellect is aglow. 
Those who from time to time, had frenzy to show. 

तुम मेरे पास होते हो गोया 
जब कोई दूसरा नहीं होता
..... मोमिन..... 

You appear to talk with me. 
When all have ceased to be. 

तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो 
तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है 
..... मुनव्वर राना..... 

It's an insult of your eyes, just think. 
One who loves you, needs a drink! 

कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई 
आओ कहीं शराब पिएँ रात हो गई 
..... निदा फ़ाज़ली..... 

Nothing is there to say, all the talks are over. 
Let's go and drink somewhere, day is over. 


यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं 
मुझे गिलास बड़े दे शराब कम कर दे 
..... बशीर बद्र..... 

Not man but dress is valued here as treasure. 
Give me in a big glass, cut the wine  in measure. 

तेरा इमाम बे-हुज़ूर तेरी नमाज़ बे-सुरूर 
ऐसी नमाज़ से गुज़र ऐसे इमाम से गुज़र 
..... अल्लामा इक़बाल..... 

Neither leadership is there, not intoxicating is prayer. 
Bypass such leadership, bypass such a prayer. 


फ़स्ल-ए-बहार आई पियो सूफ़ियो शराब 
बस हो चुकी नमाज़ मुसल्ला उठाइए 
..... हैदर अली आतिश..... 

It's spring time, O hermits! Now drink wine. 
Enough of prayer time, fold mat pristine. 

जो मैं सर-ब-सज्दा हुआ कभी तो ज़मीं से आने लगी सदा 
तिरा दिल तो है सनम-आश्ना तुझे क्या मिलेगा नमाज़ में..... इक़बाल..... 

When my head was prayer- bound, a voice came from ground. 
Your heart is idol-bound, what  in prayer, can there be found? 

मय-कशों में न कोई मुझ सा नमाज़ी होगा 
दर-ए-मय-ख़ाना पे बिछता है मुसल्ला अपना..... आग़ा अकबराबादी..... 

Among drunkards, none can 
match me in prayer. 
Even in tavern, is spread out
 my mat of prayer. 

मुसल्ला रखते हैं सहबा-ओ-जाम रखते हैं 
फ़क़ीर सब के लिए इंतिज़ाम रखते हैं 
..... वाली आसी..... 

There's a prayer-mat, there are cups and wine. 
For each one, mystics  have an arrangement, fine! 

उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में 
फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते 
..... बशीर बद्र..... 

Let  birds keep flying in wind so bold. 
Childhood days don't return to hold. 


दुआएँ याद करा दी गई थीं बचपन में 
सो ज़ख़्म खाते रहे और दुआ दिए गए हम..... इफ़्तिख़ार आरिफ़.....

In childhood, many prayers were battered in mind. 
I have been wounded, but prayer was there in mind. 

मेरा बचपन भी साथ ले आया 
गाँव से जब भी आ गया कोई 
..... कैफ़ी आज़मी..... 

He brought my childhood back. 
When one came from village track. 

असीर-ए-पंजा-ए-अहद-ए-शबाब कर के मुझे 
कहाँ गया मिरा बचपन ख़राब कर के मुझे..... मुज़्तर ख़ैराबादी..... 

Binding me within the fist of youth. 
Where's  gone my childhood uncouth? 

वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी 
इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे..... परवीन शाकिर....

I knew that he won't come this  eve, still. 
With some thought, I kept on waiting still. 

मैं सोचता हूँ बहुत ज़िंदगी के बारे में 
ये ज़िंदगी भी मुझे सोच कर न रह जाए 
..... अभिषेक शुक्ला.....

I keep thinking a lot about this life.
May be an idea comes in mind of life! 

मुझ से बिछड़ के तू भी तो रोएगा उम्र भर 
ये सोच ले कि मैं भी तिरी ख़्वाहिशों में हूँ 
..... अहमद फ़राज़..... 

You 'll also cry life long, when we depart. 
Well, I am a part of your desire cart. 

हम तो दिन-रात इसी सोच में मर जाएँगे 
तुझ से बिछड़ेंगे तो किस हाल में है घर जाएँगे..... राम नाथ असीर .... 

Day' n night I 'll die with this thought, this clue. 
 In which state,' ll I go home after parting with you