Monday, 9 January 2023

मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं कपीश्वर। 
यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्तु मेव।। 

मंत्र, क्रिया, औ' भक्ति से हूँ मैं कपिवर हीन।
 पूजा पूरन कर सकूँ अवसर ऐसो दीन।। 







Friday, 6 January 2023

मिर्ज़ा असदुल्लाह ख़ान ग़ालिब 

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं 
ये बात है तो ठहर के उसके शहर में देखते हैं 
याँ  तो जो आये है वो पास ही बैठे है तिरे
हम कहाँ तक तेरे पहलू से सरकते जाएँ '

আমি জেনে শুনে বিষ করে চি পান 

ਪ੍ਰੇਮ ਨਾਲ ਮੱਥੇ ਲਗੀਂ ਦਾਤਾ ਦੇ ਦਰਬਾਰ। 
ਜਦ ਹੋਵੇ ਰੱਬ ਦੀ ਮੇਹਰ ਲੌ  ਲੱਗੇ ਓਂਕਾਰ 

نہ جانے اہ کی ان آنسوں  پی کیا گزری 
جو دل سر آنکھ  تک اے مشزاں 

 हम दो तन हैं एक प्राण हैं, आज 
हुआ यह स्पष्ट
तेरे तन पर, पर- नारी नख- घाव, 
मुझे दें कष्ट

आमरा दुई शोरीर ऐक आत्ता,आज के 
होलो स्पोष्टो
नखो-घा आच्चेन तोमार तोने, आमार
 मोने कोष्टो....... बाङ्ग्ला....

इक्को आत्मा ते दो झब्बे, आई समझ अज्ज ओए रब्बे
होर कुड़ी ने दित्ते घा', मैंनूँ दिंदे पीड़ अथा' 
..... पंजाबी..... 


..... मूल श्लोक.... .. संस्कृत.....
(जोशी जी से अपेक्षित) 

Thursday, 5 January 2023

हज़ार दास्तान-ए-इश्क़ पर शेरहज़ार दास्तान-ए-इश्क़से चयनित शे'र - संजीव सराफ़ द्वारा संकलित और अनूदित ख़ूबसूरत उर्दू अशआर का संकलन सलीस अंग्रेज़ी अनुवाद के साथ

तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो 

तुम को देखें कि तुम से बात करें 

फ़िराक़ गोरखपुरी
टैग्ज़ : फ़ेमस शायरी और 1 अन्य 
 
इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब' 

कि लगाए न लगे और बुझाए न बने 

मिर्ज़ा ग़ालिब
टैग्ज़ : इश्क़ और 3 अन्य 
  
करूँगा क्या जो मोहब्बत में हो गया नाकाम 

मुझे तो और कोई काम भी नहीं आता 

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
टैग्ज़ : इश्क़ और 3 अन्य 
  
दिल की वीरानी का क्या मज़कूर है 

ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया 

मीर तक़ी मीर
टैग्ज़ : दिल और 1 अन्य 
 
गर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है जो चाहो लगा दो डर कैसा 

गर जीत गए तो क्या कहना हारे भी तो बाज़ी मात नहीं 

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ है 

यानी अपना ही मुब्तला है इश्क़ 

मीर तक़ी मीर
टैग्ज़ : इश्क़ और 1 अन्य 
  
उस ने अपना बना के छोड़ दिया 

क्या असीरी है क्या रिहाई है 

जिगर मुरादाबादी
 
 
क्यूँ नहीं लेता हमारी तू ख़बर ऐ बे-ख़बर 

क्या तिरे आशिक़ हुए थे दर्द-ओ-ग़म खाने को हम 

नज़ीर अकबराबादी
 
  
तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा 

दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँ इतने हिजाबों में मिलें 

अहमद फ़राज़
 
  
इश्क़ में मौत का नाम है ज़िंदगी 

जिस को जीना हो मरना गवारा करे 

कलीम आजिज़
टैग्ज़ : इश्क़ और 1 अन्य 
 
ना-कामी-ए-इश्क़ या कामयाबी 

दोनों का हासिल ख़ाना-ख़राबी 

हफ़ीज़ जालंधरी
 
 
काबे से ग़रज़ उस को न बुत-ख़ाने से मतलब 

आशिक़ जो तिरा है न इधर का न उधर का 

शाह नसीर
 
 
परस्तिश की याँ तक कि ऐ बुत तुझे 

नज़र में सभों की ख़ुदा कर चले 

मीर तक़ी मीर
 
  
बातें नासेह की सुनीं यार के नज़्ज़ारे किए 

आँखें जन्नत में रहीं कान जहन्नम में रहे 

अमीर मीनाई
 
 
सौ बार बंद-ए-इश्क़ से आज़ाद हम हुए 

पर क्या करें कि दिल ही अदू है फ़राग़ का 

मिर्ज़ा ग़ालिब

तड़पती देखता हूँ जब कोई शय 

उठा लेता हूँ अपना दिल समझ कर 

मुंशी अमीरुल्लाह तस्लीम
 
 
हो गया ज़र्द पड़ी जिस पे हसीनों की नज़र 

ये अजब गुल हैं कि तासीर-ए-ख़िज़ाँ रखते हैं 

इमाम बख़्श नासिख़
 
 
बस मोहब्बत बस मोहब्बत बस मोहब्बत जान-ए-मन 

बाक़ी सब जज़्बात का इज़हार कम कर दीजिए 

फ़रहत एहसास
 
  
ता-फ़लक ले गई बेताबी-ए-दिल तब बोले 

हज़रत-ए-इश्क़ कि पहला है ये ज़ीना अपना 

जुरअत क़लंदर बख़्श
 
 
ख़्वाह दिल से मुझे न चाहे वो 

ज़ाहिरी वज़्अ' तो निबाहे वो 

अनवर शऊर
 
  

Monday, 2 January 2023

श्रीदुर्गामानस-पूजा

उद्यच्चन्दनकुङ्कुमारुणपयोधाराभिराप्लावितां
 नानानर्ध्यमणिप्रवालघटितां दत्तां गृहाणाम्बिके।
आमृष्टां सुरसुन्दरीभिरभितो हस्ताम्बुजैर्भक्तितो 
मातः सुन्दरि भक्तकल्पलतिकेश्रीपादुकामादुरात।। 


भक्तन की मन इच्छा पूर्ण करी , हे कल्पलता माँ त्रिपुर सुन्दरी।
चरण कमल में पादुका, ग्रहण करें देव आराधिता।
उत्तम चन्दन औ' कुंकुम के,  माता ये धुलीं लाल जल से।
अगणित मणियों औ' मूँगों से, धुल देव-नारियों अङ्गों से।
कर भक्ति सहित पोंछा इनको, कर स्वच्छ तभी सोंपा इनको।। ।।

देवान्द्रादिभिरर्चितं सुर गणैरादाय सिंहासनं
चञ्चत्काञ्चनसंचयाभिरचितं चारुप्रभाभास्वरम्।
एतच्चम्पककेतकीपरिमलं तैलं महानिर्मलं
गन्धोद्वर्तनमादरेण तरुणीदत्तं गृहाणाम्बिके ।। ।। 

माँ ! आप बैठें इसलिए देवों ने है निर्मित किया। 
इस दिव्य सिंहासन को पावन कीजिए हे शिव प्रिया। 
पूजन करें सुरराज आदि भी, यह सिंहासन है वही। 
इसे राशि राशि सुवर्ण, अपनी कान्ति से चमका रही। 
होता प्रकाशित यह प्रभा से औ' सुगन्धित भी किया । 
 केतकी', चम्पा के निर्मल तेल से उबटन किया।
कर रहीं प्रस्तुत देव कन्याएँ इसे सत्कार से। 
माँ आप तो स्वीकार करतीं भेंट जो हो प्यार से।। ।। 


एक चतुष्पदी की विभिन्न भाषाओं में रचना...Transcreation of a tetrad in various languages.. . रवि मौन

खेलै एक घास मैं टाबर अठै - उठीनैं। 
मा हाँसै कन्नै ई बैठी सै नै चीने।
मूनैं हैरानी हो री सै या समझाओ। 
काबा सोमनाथ मैं जाकै थे के पाओ? 
..... (मारवाड़ी/हिन्दी )..... 

खेल रह्यो सै छोरो एक घास मैं भाई। 
ऐं नैं देखै, बर-बर हँस री ऐं की माई।  काबा सोमनाथ जो जार्या सैं, जाणै दै। 
के करणू सै मन्नैं, उण नैं ई घबराणै दे।। 

..... (हरियाणवी/हिन्दी )..... 


तृणै खेलै एक टी बाच्चा ।
काछे मिष्टी मुखे मा हाशे। 
कैनू लोके काबा शोमनाथ जाय? 
आमि हैरान, माथाय ना आशे।। 
..... (बाङ्ग्ला).....

A child is playing on the grass. 
While mother smiles sitting nearby. 
Still people visit Kaaba, Somnath. 
I have always wondered, why? 

 खेड रिह्या एक निक्का मुण्डा घासे। 
मा हसदी - वगदी- रहंदी आसे-पासे।
दुनिया काबा सोमनाथ वी जांदी। 
मैंनूँ अचरज हुंदा, समझ न आंदी।। 

..... (पंजाबी)..... 


(Original qat'aa in Urdu by Akhtar Ansari) 

घास पर खेलता है एक बच्चा। 
पास माँ बैठी मुस्कराती है। 
मैं हूँ हैरान, किसलिए दुनिया, 
का'बा और सोमनाथ जाती है? 





Sunday, 1 January 2023

हरि थे थामो मन मन की डोर.... रवि मौन

हरि थे थामो मन की डोर।

बृन्दाबन का रास रचैया, नटवर, नन्द किशोर। 
हे गिरिधर, बनवारी, मेरो चित भटकै
 चहुँ ओर।। 
हरि थे थामो मन की डोर...... 

मेरी भी सुध लीजो हे प्रभु, राधा का चितचोर। 
दीनानाथ, दयानिधि, माधव, भक्तन का सिरमौर।। 
हरि थे थामो मन की डोर..... 

हे गौपालक, जसुदा नन्दन, बृज का माखनचोर। 
विषय-ग्राह खींच्याँ ले स्वामी गहरा 
जल की ओर।। 
हरि थे थामो मन की डोर..... 

बंसी धुन तो छेड़ कन्हैया, गैयाँ ढूँडैं ठोर ।
नाचैं राधा अर साँवरिया, मौन यो थारो  ढोर ।। 
हरि थे थामो मन की डोर....... 

REKHTA.. TODAY'S 5 COUPLETS

दीवार-ओ-दर ख़ून के छींटे हैं जा-ब-जा
बिखरा हुआ है रंग-ए-हिना तेरे शहर में
..... कैफ़ अज़ीमाबादी.....

The stains of blood are there, on doors 'n walls everywhere.
Scattered is henna' s colour,
 in your city, what a horror !

ज़िंदगी भर दर-ओ-दीवार सजाए जाएँ
तब कहीं जा के मकीनों पे मकां खुलते हैं
..... हसन जमील.....

Whole life you decorate it's walls 'n door. 
House ie then open to owner not before.

आँख खुलते ही बस्तियाँ ताराज
कोई  लज़्ज़त नहीं है ख़्वाबों में
..... आशुफ़्ता चंगेज़ी..... 

As eyes open , areas are ruined to core
There's no pleasure in dreams any more. 

ज़िंदगी गुम न दोस्ती गुम है
सच यही है कि आदमी गुम है
..... कँवल डिबाइवी..... 

Neither life nor friendship is absent. 
It's truth that the man is absent. 

उन के रुख़्सार देख जीता हूँ 
आरज़ी मेरी जिंदगानी है
..... नाज़ी शाकिर..... 

Her cheek look is my life 
So temporary is my life. 

रुख़सत करने के आदाब निभाने ही थे
बंद आँखों से उसको जाता देख लिया है 
..... परवीन शाकिर..... 

Protocol of departing had to 
be in place. 
With eyes shut , I saw him make  space. 

दिल भी तोड़ा तो सलीक़े से न तोड़ा तुम ने 
बेवफ़ाई के भी आदाब हुआ करते हैं 
..... माहताब आलम.....

You broke the heart but not in style 
Being faithless has it's manner 'n style. 

बोले कि तुझ को दीन की इस्लाह फ़र्ज़ है 
मैं चल दिया ये कह के कि आदाब अर्ज़ है..... अकबर इलाहाबादी..... 

बाग़ में जाने के आदाब हुआ करते हैं 
किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाए 
..... निदा फ़ाज़ली.....