Tuesday 15 December 2020

NASIR KAZMI.. GHAZAL.. APNI DHUN MEN RAHTAA HUUN...

 अपनी धुन में रहता हूँ।
मैं भी तेरे जैसा हूँ। 

In my ardour, I have flown. 
I am like you, now've known.

ओ पिछली रुत के साथी। 
अब के बरस मैं तन्हा हूँ। 

O pal of weather bygone. 
This year, I am all alone.

तेरी गली में सारा दिन। 
दुःख के कंकर चुनता हूँ। 

Day long, in your lane O mate! 
I gather pebbles of sad tone. 

मुझ से आँख मिलाए कौन? 
मैं तेरा आईना हूँ। 

Who can have the guts to see? 
I am your mirror, well shown. 

मेरा दिया जलाए कौन ? 
मैं तिरा ख़ाली कमरा हूँ। 

Who will light my lamp? 
I am your room, so lone. 

तू जीवन की भरी गली। 
मैं जंगल का रस्ता हूँ। 

You are lane, full of life. 
I am jungle path, so lone. 

आती रुत मुझे रोएगी। 
जाती रुत का झोंका हूँ। 

Weather to come, 'll cry for me. 
I am waft of air, bygone. 

अपनी लहर का अपना रोग। 
दरिया हूँ और प्यासा हूँ। 

Each wave ails for itself. 
 Sea is thirsty, can not moan. 




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