Sunday, 13 March 2022

रवि मौन...... केवट प्रसंग

राम कहें, केवट तूने तोड़ा मेरा अभिमान ।
मिला सहारा भक्त का, खड़े रहे भगवान।

भीगा पग मम हाथ पर, सर पर रखिए हाथ। 
मिले मुझे आशीश यूँ, तर जाऊँ रघुनाथ। 

इस जल का सेवन करूँ मैं, मेरा परिवार। 
पितरों का तर्पण करूँ इस से अंतिम बार।

लिया आपने हे हरि, कछुए का अवतार।
मैं परिजन था, छू सका पैर न किसी  बार। 

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