Monday, 9 January 2023

मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं कपीश्वर। 
यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्तु मेव।। 

मंत्र, क्रिया, औ' भक्ति से हूँ मैं कपिवर हीन।
 पूजा पूरन कर सकूँ अवसर ऐसो दीन।। 







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