Thursday, 8 December 2022

COUPLETS OF VARIOUS POETS

ख़ुदा जाने करेगा चाक किस किस के गरेबाँ को
अदा से उन का चलने में वो दामन को उठा लेना

God knows how many robes will be tattered in meanwhile.
Her lifting a little hem while walking in coquettish style. 

वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक ख़ूब- सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा..... साहिर लुधियानवी..... 

A tale that can not reach it's end. 
Is good to be quit with a lovely bend. 

उस को भी हम से मोहब्बत हो ज़रूरी तो नहीं 
इश्क़ ही इश्क़ की क़ीमत हो ज़रूरी तो नहीं..... सबा अकबराबादी..... 

It's not essential with me, she is also in love. 
It's not essential, love is to be paid with love. 

दोस्ती आप से लाज़िम है मगर इस के लिए 
सारी दुनिया से अदावत हो ज़रूरी तो नहीं

It's necessary for us to be friends but for that. 
It's not essential, with world,
 to be against love. 

अल्लाह रे उस गुल की कलाई की नज़ाकत
बल खा गई जब बोझ पड़ा रंग - ए-हिना का..... अमीर मीनाई..... 

O God!  How delicate is that flowery wrist?
 With weight of henna colour,
 it got a twist. 

जाम-ए-मय तौबा-शिकन तौबा मिरी जाम-शिकन 
सामने ढेर है टूटे हुए पैमानों का 

Wine cup shatters promise, my promise breaks wine cups. 
Confronting me is a heap of those broken wine cups. 



कौन गुज़रा है यहाँ से कि मोअ'त्तर है हवा 
जानी-पहचानी सी लगती है पवन की ख़ुशबू..... प्रोफ़ेसर महमूद आलम..... 

Who has passed this way that fragrant is wind. 
It appears well known, this fragrance of wind. 

रोक सको तो पहली बारिश की बूँदों को तुम रोको
कच्ची मिट्टी तो महकेगी है मिट्टी की मजबूरी..... मोहसिन भोपाली..... 

With hold the drops of first rain if you can. 
Raw soil 'll be fragrant, no other way it can. 

ये मेरा दिल है कि मंज़र उजाड़ बस्ती का 
खुले हुए हैं सभी दर मकीं नहीं आता
..... शहरयार..... 

Is it my heart or a scene of ruined village part? 
No resident is seen, doors
 are open to screen . 

बस्ती में अपनी हिन्दू मुसलमाँ जो बस गए 
इंसाँ की शक्ल देखने को हम तरस गए 
..... कैफ़ी आज़मी..... 

In our residential site, Hindus, Muslims set their might. 
Now to see a human face, I have longed to trace. 

अनोखी वज़्अ' है सारे ज़माने से निराले हैं 
ये आशिक़ कौन सी बस्ती के या-रब रहने वाले हैं..... इक़बाल..... 

Their style is unique, incomparable technique. 
O God! Which is the lane, 
where lovers remain? 

देखने के लिए इक चेहरा बहुत होता है 
आँख जब तक है तुझे सिर्फ़ तुझे देखूँगा
शहरयार 

One face is enough, to see really enough. 
Till these eyes last, only on 
you 'll be cast. 

किसी को काँटों से चोट पहुँची किसी को फूलोँ ने मार डाला। 
जो बच गए इन मुसीबतों से उन्हें उसूलों ने मार डाला 

Some were hurt by the thorns, some by flowers got hurt. 
Spared by these troubles, were done with principles curt. 

जिस ज़ख़्म की हो सकती हो तदबीर रफ़ू की 
लिख दीजियो या रब उसे क़िस्मत में अदू की..... मिर्ज़ा ग़ालिब..... 

A wound that's repairable anyway O mate ! 
Almighty ! Prescribe it in
 rival's fate.

बे-नाम से इक ख़ौफ़ से दिल क्यूँ है परेशाँ 
जब तय है कि कुछ वक़्त से पहले नहीं होगा..... शहरयार..... 

Why is the heart worried about an unknown fear? 
When  nothing would happen before time O dear. 

तदबीर के दस्त-ए-रंगीं से तक़दीर दरख़्शाँ होती है 
क़ुदरत भी मदद फ़रमाती है जब कोशिश-ए-इंसाँ होती है 

Colourful hand of effort adds brightness to your fate. 
Nature offers helping hand with human toil O mate. 

मैं इज़्तेराब - ए-शौक़ कहूँ या जमाल-ए-दोस्त 
इक बर्क़ है जो कि कोंध रही है नक़ाब के में..... असग़र गोंडवी...... 

Should I do call it longing or beauty of her face. 
There's an electric spark inside veiled space. 

अदा-शनास भी थे अरस-ए-क़यामत में 
समझ के आप को रुख़ से नक़ाब उठाना था.....सफ़दर मिर्ज़ापुरी.....

There were many to recognise your style on doomspace. 
You should have considered it before lifting veil from face. 

ये इज़्तेराब देख कि अब दुश्मनों से भी 
कहता हूँ उन से मिलने की अब तुम दुआ करो..... मीर तक़ी मीर..... 

Look at my longing that even to foes I  say. 
For meeting with her, you too please pray. 

न मानूंगा नसीहत पर न सुनता मैं तो क्या करता
कि हर हर बात में नासेह तुम्हारा नाम लेता था..... मोमिन..... 

What could I do but to listen, though I won't agree. 
The preacher took your name in every talking spree. 

अगर मरते हुए लब पर न तेरा नाम आएगा 
तो मैं मरने से बाज़ आया मेरे किस काम आएगा... शाद अज़ीमाबादी... 

While dying, if on lips, there won't be your name. 
Then what good is death, I  retreat my name. 

हम क्या करें न तेरी अगर आरज़ू करें 
दुनिया में और भी कोई तेरे सिवा है क्या? 
..... हसरत मोहानी..... 

What else can I do, if not to desire you. 
In world, is there anyone else besides you. 

बस रहा है कि मेरी आँखों में वही जान-ए-बहार
जिस का हमरंग कोई फूल चमन भर में नहीं..... ताजवर नजीमाबादी..... 

In my eyes dwells, that life of spring spells. 
Whose look alike, isn't there in garden to like. 

गुज़ारी देखने में उस के सारी ज़िन्दगी मैंने 
मगर ये शौक़ है देखा नहीं गोया कभी मैंने..... नातिक़ लखनवी..... 

My life is gone, in watching her alone. 
But I still long, to see her for long. 

तिरा तबस्सुम फ़रोग़-ए-हस्ती तिरी नज़र एतबार-ए-मस्ती
बहार इक़रार कर रही है, शराब ईमान ला रही है..... अब्दुल हमीद अदम..... 

Lifting life is your smile, look causes frenzy in a while. 
Agreeable is all in spring, faith does the wine bring. 

ये आरज़ू थी तुझे गुल के रू-ब-रू करते
हम और बुलबुल-ए-बे-ताब गुफ़्तगू करते
..... आतिश..... 

It was a desire to confront you and a flower. 
Me and  impatient nightingale
talking sweet 'n sour. 

ने दिल को छू है सबात न हम को है
 ऐ' तिबार
किस बात पर चमन हवस-ए-रंग-ओ-बू करें 

Neither heart is stable, nor I have the belief. 
How can garden lust for colour and fragrance fief. 

तुम्हारी याद में डूबे कहाँ कहाँ से गए
हम अपने आप से बिछड़े तो सब जहाँ से गए..... सादिक़ा नवाब सहर..... 

Submerged in your memories, I went from place to place 
Departing with the self, from whole world I lost trace. 

पहले आती थी हाल-ए-दिल पे हँसी
अब किसी बात पर नहीं आती 
..... मिर्ज़ा ग़ालिब..... 

 I laughed at heart outright
But now my lips are tight. 

मौत का एक दिन मुअय्यन है 
नींद क्यूँ रात भर नहीं आती

The day of death is fixed. 
Why can't I sleep whole night? 

काबा किस मुँह से जाओगे 'ग़ालिब' 
शर्म तुम को मगर नहीं  आती

What a face for Kaabaa O 'Ghalib'? 
But you are ashamed of nothing in sight. 

चूम लेती हैं कभी लब कभी आरिज़-ए-गुल
तूने ज़ुल्फ़ों को बहुत सर पे चढ़ा रक्खा है 

They kiss your flowery cheeks and lips. 
Your tress has learnt from you heady tips. 

ऐ मौज-ए-बला इन को भी ज़रा दो चार  थपेड़े हल्के से
कुछ लोग अभी तक साहिल से तूफ़ाँ का नज़ारा करते हैं..... जज़्बी..... 

O wave of problems  to those, give a few shoves quite close. 
Still some people from shore, watch the storm power core. 

इक ज़ख़्म था जो वक़्त के हाथों से भर गया 
क्या पूछते हैं आप किसी भी मेहरबाँ की बात? 

It was a wound that got healed with the time. 
Why talk about the considerate man sublime? 

गर्दिश-ए-वक़्त भी आगे मुझे ले जा न सकी
तुम जहाँ छोड़ गए थे मैं वहीं हूँ अब तक

The tides of time have not changed my state. 
I am still at the place, where you left me mate. 

ये तस्वीरें ब-ज़ाहिर तो बहुत ख़ामोश रहती हैं 
मगर अहल-ए-नज़र देखें तो दिल की बात कहती हैं 

Apparently these murals keep a silent pose. 
But to those who watch, give a hearty dose. 

वो रंगीला हाथ मेरे दिल पे और उस की महक
शम'अ-ए-दिल बुझ सी गई रंग-ए-हिना के सामने..... मुनीर नियाज़ी..... 

That painted hand on heart fence, and then it's fragrance. 
Almost put out was heart lamp, against her hennaed stamp. 

मैं तो उस को देखते ही जैसे पत्थर हो गया 
बात तक मुँह से न निकली बेवफ़ा के सामने..... मुनीर नियाज़ी..... 

On seeing her alone, I was turned into stone. 
Nothing came out of lips, before infidel, talk slips. 

याद भी हैं ऐ 'मुनीर' उस शाम की तन्हाइयाँ
एक मैदाँ इक दरख़्त और तू ख़ुदा के सामने 

'Muneer'do you recollect, that eve' s solitude effect. 
Stray land and a tree, before God you were  free. 

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें 
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें 

We may meet in dreams if now we part. 
As dry flowers in books from days of start. 

तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा
दोनों इंसाँ हैं तो क्यों इतने हिजाबों में मिलें..... अहमद फ़राज़..... 

Neither you are God nor my love angelic. 
We are humans, why curtains keep apart. 

तू मिला है तो ये अहसास हुआ है मुझ को
मेरी ये उम्र मोहब्बत के लिए थोड़ी है

I realise now after  meeting you pal. 
This life for love is far too small. 

इक ज़रा सा ग़म-ए-दौराँ का भी हक़ है मुझ पर 
मैंने वो साँस भी तेरे लिए रख छोड़ी है

A claim of some pain of world exists. 
I have spared those breaths for you in all. 

हर एक घर का दरीचा सजा है गमलों से
तमाम दश्त कटे बस्तियाँ बनाने में 
..... जावेद उल्फ़त..... 

Planted pots decorate, every window O mate. 
Many jungles were razed, for  buildings to be raised. 

एक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है
मैंने हर करवट सोने की कोशिश की

Night long, a dream has kept  me awake
In many turns, sleep I have tried to take. 

कुछ उसूलों का नशा था कुछ मुक़द्दस ख़्वाब थे 
हर ज़माने में शहादत के यही अस्बाब थे 
..... हसन नईम..... 

Intoxicated by principles and sacred dreams. 
Were every time, tools of being martyr, it seems. 

हम अपने इश्क़ की अब और क्या शहादत दें 
हमें हमारे रक़ीबों ने मो'तबर जाना 
..... आलमताब तिश्ना..... 

What else as a proof can I place for my love ? 
My rivals hold me in regard over and above. 

मैं भी यहाँ हूँ इस की शहादत में किस को लाऊँ 
मुश्किल ये है कि आप हूँ अपनी नज़ीर मैं 
..... फरहत अहसास..... 

Whom else to bring for a witness, as I am here. 
The trouble is that I am my 
own example here. 

दस्त-ए-जुनूँ ने फाड़ के फेंका इधर-उधर 
दामन अबद में है तो गरेबाँ अज़ल में है 
..... अहमद अली ख़ान क़लक़..... 

Hands of frenzy tore it, threw this way 'n that to probe. 
The hem is in beginning and 
till eternity, stretches robe. 

अज़ल से आज तक सज्दे किए और ये नहीं सोचा 
किसी का आस्ताँ क्यूँ है किसी का संग-ए-दर क्या है..... सबा अकबराबादी.....

Since eternity I prayed but had not thought.
 Why is stone of someone 's door and what? 

ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचल 
नशा शराब में होता तो नाचती बोतल 
..... आरिफ़ जलाली..

This is stirring is caused only by your own joy. 
Had wine intoxicated, bottle'd dance as a toy

अपनी मस्ती में बहता दरिया हूँ 
मैं किनारा भी हूँ भँवर भी हूँ 
..... तहज़ीब हाफ़ी..... 

I am a river in my own flow. 
I am ashore with whorl to show. 

'मीर' उन नीम-बाज़ आँखों में 
सारी मस्ती शराब की सी है 
..... मीर तक़ी मीर..... 

'Mir'! In those eyes half closed. 
Is ecstasy of wine over dosed. 

फ़लक देता है जिन को ऐश उन को ग़म भी होते हैं 
जहाँ बजते हैं नक़्क़ारे वहाँ मातम भी होता है..... दाग़ देहलवी..... 

Pleasure and pain are accorded to same person by skies. 
Where drums are beaten, there are always mourning cries. 

उठ गई हैं सामने से कैसी कैसी सूरतें 
रोइए किस के लिए किस किस का मातम कीजिए..... हैदर अली आतिश..... 

So many lovely faces have gone out of sight. 
Whom to mourn for and cry in whose plight

जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँ 
यहाँ तो कोई मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता 
..... कैफ़ी भोपाली..... 

Why mourn so much, if God isn't found. 
Speaking same language here isn't around. 


कितने संगीन हक़ाएक़ से निचोड़ा है लहू 
चंद ख़्वाबों के लिए चंद ख़यालों के लिए
..... आल-ए-अहमद सुरूर..... 

Blood was extracted from many hard facts. 
For some dreams and some thoughtful tacts. 

ख़मोशी से मुसीबत और भी संगीन होती है 
तड़प ऐ दिल तड़पने से ज़रा तस्कीन होती है..... शाद अज़ीमाबादी..... 

With silence, trouble becomes ever harder than before. 
Writhe O heart, comfort is achieved by it from each pore.

कोई हलचल है न आहट न सदा है कोई 
दिल की दहलीज़ पे चुप-चाप खड़ा है कोई..... ख़ुर्शीद अहमद जामी..... 

There's no hustling, light sound or voice. 
On heart gate he stands silently as choice.
...... 
एक तुम्हारा  होना क्या से क्या  कर देता है 
बे-ज़ुबान छत दीवारों को घर देता है
..... महेश्वर तिवारी..... 

What does your being do? You  can not know it too. 
These roofs 'n walls so dumb.  In shape of a home succumb. 

होंटों को रोज़ इक नए दरिया की आरज़ू 
ले जाएगी ये प्यास की आवारगी कहाँ 
...... वसीम बरेलवी..... 

A lust for lipping a new river daily to feed ! 
O roaming! Where' ll this thirst of desires lead? 

सौ मिलीं ज़िंदगी से सौग़ातें 
हम को आवारगी ही रास आई 
..... अली सरदार जाफ़री..... 

Hundreds of gifts did the  life offer. 
Roaming was  my desired. coffer. 

न जाने बर्क़ की चश्मक थी या शरर की लपक
ज़रा जो आँख झपक कर खुली, शबाब न था..... मीर अनीस..... 

I know not if it was electric arc or simply a fire spark. 
Within blinking of the eye, youth wasn't in body park. 

शबाब नाम है उन जाँ नवाज़ लम्हों का
जब आदमी को ये महसूस हो जवाँ हूँ मैं 
..... नेआज़ फ़तहपुरी...... 

Youth is the name of those moments so pleasant. 
When the feeling of being young is always  present. 

शबाब मिट चुका याद-ए-शबाब बाक़ी है 
है बू शराब की साग़र में अब शराब नहीं 
..... अख़्तर शीरानी..... 

The youth is over, it's memory persists. 
There's no wine in jug,but smell exists. 

सब को है तेरे जल्वा-ए-रंगीं की जुस्तजू 
ये कौन सोचता है कि ताब-ए-नज़र नहीं 
..... राक़िम लखनवी.....

Everyone is searching  colourful glimpse of your's. 
Who thinks that there's no
 power  to see of course. 

मुझे धोखा न देतीं हों वही तरसी हुई नज़रें 
तुम्हीं हो सामने या फिर वही तस्वीर-ए-ख़्वाब आई... आनंद नारायण मुल्ला... 

Am I being deceived by my craving eyes? 
Is it you or again a picture of dream 'n sighs? 

मैं हूँ वो नंग-ए-ख़ल्क़ कि कहती फिरे है ख़ाक 
इस को बना के क्यूँ मिरी मिट्टी ख़राब होने की..... ज़िया बेग़म ज़िया..... 

I am such a low being, dust goes places to tell my name. 
Why shaped him out of me 
and put my name to shame? 

होगा किसी दीवार के साए के तले 'मीर'
क्या काम मोहब्बत से उस आराम-तलब को..... मीर तक़ी मीर..... 

'Mir' is likely to be lying in the shade of a wall. 
He is idle, why would work for love to befall? 

वो तो बता रहा था कई रोज़ का सफ़र
ज़ंजीर खींच कर वो मुसाफ़िर उतर गया 
..... जावेद अख्तर..... 

He 'd travey many a day, or so did he say. 
One who pulled chain and got down the train. 

बहुत आसान है पहचान इस की
अगर दुखता नहीं तो दिल नहीं है 
..... जावेद अख्तर..... 

It's very easy just for anyone
 to find. 
If unhurt, it's not heart of any kind. 

दिल वो नगर नहीं है कि फिर आबाद हो सके
पछताओगे सुनो हो ये बस्ती उजाड़ के 
..... मीर तक़ी मीर..... 

Heart is not a city that can be  rehabilitated. 
Let me tell it, you 'll regret, if 
it is vacated. 

दिल की बर्बादी का क्या मज़कूर हो
ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया 
..... मीर तक़ी मीर..... 

How ruined is the heart, why talk in vain? 
This city was plundered again  and again. 

हम सहल-तलब कौन से फ़रहाद थे लेकिन 
इस शहर में तेरे कोई हम सा भी नहीं 
है..... मीर तक़ी मीर..... 

I am idle, not workaholic Farhad of yore. 
In this city, there's none 
 like me anymore. 

जफ़ा के ज़िक्र पे तुम क्यूँ संभल के बैठ गए 
तुम्हारी बात नहीं, बात है ज़माने की

Why talk of infidelity has stirred you to core. 
It's tale of the world, not your's anymore. 

कुछ तो होते हैं मोहब्बत में जुनूँ के आसार 
और कुछ लोग भी दीवाना बना देते हैं 

Basic traits of insanity exist in love domain. 
People add a  bit more to make lover insane. 

मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है 
किसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता..... जावेद अख्तर..... 

I expect self respect even from the foes. 
Be it anyone 's head, looks  no good on toes. 















मैं हूँ वो नंग-ए-ख़ल्क़ कि कहती फिरे है ख़ाक 
इस को बना के क्यूँ मिरी मिट्टी ख़राब होने की..... ज़िया बेग़म ज़िया..... 

I am such a low being, dust goes places to tell my name. 
Why shaped him out of me 
and put my name to shame? 

होगा किसी दीवार के साए के तले 'मीर'
क्या काम मोहब्बत से उस आराम-तलब को..... मीर तक़ी मीर..... 

'Mir' is likely to be lying in the shade of a wall. 
He is idle, why would work for love to befall? 

वो तो बता रहा था कई रोज़ का सफ़र
ज़ंजीर खींच कर वो मुसाफ़िर उतर गया 
..... जावेद अख्तर..... 

He 'd travey many a day, or so did he say. 
One who pulled chain and got down the train. 

बहुत आसान है पहचान इस की
अगर दुखता नहीं तो दिल नहीं है 
..... जावेद अख्तर..... 

It's very easy just for anyone
 to find. 
If unhurt, it's not heart of any kind. 

दिल वो नगर नहीं है कि फिर आबाद हो सके
पछताओगे सुनो हो ये बस्ती उजाड़ के 
..... मीर तक़ी मीर..... 

Heart is not a city that can be rehabilitated. 
Let me tell it, you 'll regret, if 
it is vacated. 

दिल की बर्बादी का क्या मज़कूर हो
ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया 
..... मीर तक़ी मीर..... 

How ruined is the heart, why talk in vain? 
This city was plundered again and again. 

हम सहल-तलब कौन से फ़रहाद थे लेकिन 
इस शहर में तेरे कोई हम सा भी नहीं 
है..... मीर तक़ी मीर..... 

I am idle, not workaholic Farhad of yore. 
In this city, there's none 
 like me anymore. 

जफ़ा के ज़िक्र पे तुम क्यूँ संभल के बैठ गए 
तुम्हारी बात नहीं, बात है ज़माने की

Why talk of infidelity has stirred you to core. 
It's tale of the world, not your's anymore. 

कुछ तो होते हैं मोहब्बत में जुनूँ के आसार 
और कुछ लोग भी दीवाना बना देते हैं 

Basic traits of insanity exist in love domain. 
People add a bit more to make lover insane. 

मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है 
किसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता..... जावेद अख्तर..... 

I expect self respect even from the foes. 
Be it anyone 's head, looks no good on toes. 

शीशा टूटे ग़ुल मच जाए 
दिल टूटे आवाज़ न आए 
..... हफ़ीज़ मेरठी..... 

सुर्ख़ियाँ अख़बार की गलियों में ग़ुल करती रहीं 
लोग अपने बंद कमरों में पड़े सोते रहे 
..... ज़ुबैर रिज़वी..... 


बुला रहा था कोई चीख़ चीख़ कर मुझ को 
कुएँ में झाँक के देखा तो मैं ही अंदर था 
..... मोहम्मद अल्वी..... 

रात भर ख़्वाब देखने वाले 
दिन की सच्चाइयों में चीख़ उठे 
..... नसीर अहमद नासिर..... 

दुनिया की बहारों से आँखें यूँ फेर लीं जाने वालों ने 
जैसे कोई लम्बे क़िस्से को पढ़ते पढ़ते उकता जाए..... नुशूर वाहिदी..... 

दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब 
क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो..... अल्लामा इक़बाल..... 

ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है 
क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम..... साहिर लुधियानवी..... 

फ़क़त निगाह से होता है फ़ैसला दिल का 
न हो निगाह में शोख़ी तो दिलबरी क्या है 
..... साहिर लुधियानवी..... 

ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम 
विसाल-ए-यार फ़क़त आरज़ू की बात नहीं..... फ़ैज़ अहमद फ़ैज़..... 

नहीं जो महमिल-ए-लैला-ए-आरज़ू सर-ए-राह
तो अब फ़ज़ा में फ़ज़ा के सिवा कुछ और नहीं
नहीं जो मौज-ए-सबा में कोई शमीम-ए-पयाम
तो अब सबा में सबा के सिवा कुछ और नहीं...... जौन एलिया 

या इसी नज़्म में एक जगह कहता है:

“तुम्हारे रंग महकते हैं ख़्वाब में जब भी
तो उनको ख़्वाब में भी ख़्वाब ही समझते हैं”

दासताँ ख़त्म होने वाली है
तुम मेरी आख़री मोहब्बत हो

हम जो बातें जुनूँ में बकते हैं
देखना जाविदानियाँ होंगी

जौन ही तो है जौन के दरपय
मीर को मीर ही से ख़तरा है


धूम करना है तो ऐ वहशत तू ख़ातिर ख़्वाह कर,
शह्र गर्दी कब ‘तलक’ सहारा से भी कुछ राह कर”..... अमीर मीनाई..... 

फ़ित्ना साज़ी भी मेरे दिल की क़यामत होती,
गर तेरे कूचे की मिट्टी से बनाया जाता” 
..... दाग़ देहलवी..... 

“मेरे ज़ख़्मों प’ छिड़क कर वो नमक कहते हैं,
वो था तलवार का जौहर ये है जौहर अपना”..... जलील मानिकपुरी 

सियहकारी से जी भरता नहीं पर शर्म आती है,
कहाँ तक बोझ रखिए कातिब ए आमाल के सर पर”..... अमीर मीनाई..... 

सुन के वो हाल मेरा ग़ैर से फ़रमाते हैं,
आए हैं आप मुहब्बत का संदेसा ले कर।”
..... दाग देहलवी..... 

क़दम क़दम पे हवादिस ने रहनुमाई की 
रवाँ है जादा-ए-मंज़िल पे कारवान-ए-ख़याल..... याक़ूब उस्मानी..... 

हर तमन्ना दिल से रुख़्सत हो गई 
अब तो आ जा अब तो ख़ल्वत हो गई 
.. ख्वाजा अज़ीज़ - उल-हसनमज्ज़ूब.. 

All the desires have left my heart. 
Come now, it's privacy in the  part. 

है आदमी बजाए ख़ुद इक महशर-ए-ख़याल 
हम अंजुमन समझते हैं ख़ल्वत ही क्यूँ न हो..... मिर्ज़ा ग़ालिब..... 
 
हथेली से ठंडा धुआँ उठ रहा है 
यही ख़्वाब हर मर्तबा देखती हूँ.... 
..... फरीहा नक़वी..... 
 
 Cold smoke from hands is on the rise. 
This dream is seen every time on (demise) /as prize. 

हुए फूल ख़ुश्क चमन जला कहीं नाम को न तरी रही
यही अपने ज़ख़्म हरे रहे यही अपनी आँख भरी रही

Flowers dried out, garden was aflame, 
There was nothing wet even in name. 
Only my wounds remained green. 
Only my  eyes were wet, had sheen. 

दुश्मन के इरादे को करना है अगर ज़ाहिर 
तुम खेल वही खेलो अंदाज़ बदल डालो

If you want to show, what's the intent of foe?
Play game as before, change style to core. 

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