Tuesday 9 August 2022

BASHIR BADR.. GHAZAL.. KHOII HUI AANKHON KA YE MANZAR NA MILEGAA......

खोई हुई आँखों का ये मंज़र न मिलेगा।
घर छोड़ के मत जाओ कहीं घर न मिलेगा।

This view of lost eyes will not be found.
Don't leave home, nowhere 'll it be found.

फिर याद बहुत आएगी ज़ुल्फ़ों की घनी शाम। 
जब धूप में साया कोई सर पर न मिलेगा। 

You' ll then remember the dense tress shade.
When no shade over your head will be found.

आँसू को कभी ओस का क़तरा न समझना। 
ऐसा तुम्हें चाहत का समंदर न मिलेगा। 

Never think tear is a drop of dew. 
Nowhere such a sea of desire will be found. 

इस ख़्वाब के माहौल में बे-ख़्वाब हैं आँखें।
जब नींद बहुत आएगी बिस्तर न मिलेगा। 

In atmosphere of dreams, eyes miss dream. 
When sleep will be much, no bed will  be found.

ये सोच लो अब आख़िरी साया है मोहब्बत। 
इस दर से उठोगे तो कोई दर न मिलेगा। 

Think well that love is the last known shade.
If you leave it, no other door  'll be found. 

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