Tuesday 27 June 2023

SAHIR LUDHIYANVI.. GHAZAL.. PARBATON KE PEYDON PAR SHAAM KA BASERAA HAI.....

पर्बतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है 
सुरमई उजाला है चम्पई अंधेरा है 

Evening is resting on hilly trees that grow. 
There is yellowish darkness and bluish glow. 

दोनों वक़्त मिलते हैं दो दिलों की सूरत से 
आसमाँ ने ख़ुश हो कर रंग सा बिखेरा है 

Day 'n night meet, as two facing hearts treat. 
Sky in pleasure has scattered colourful glow. 

ठहरे ठहरे पानी में गीत सरसराते हैं 
भीगे भीगे झोंकों में ख़ुशबुओं का डेरा है 

In these static waters,it's song that whispers. 
Gushes which are moist, have a fragrant flow. 

क्यूँ न जज़्ब हो जाएँ इस हसीं नज़ारे में 
रौशनी का झुरमुट है मस्तियों का घेरा है

Why don't we absorb in this beautiful orb? 
There is frenzied circle and assembled glow. 




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