फिर भी इक शख़्स में क्या क्या नज़र आता है मुझे
Neither alights me on eyelashes, nor lets occpy the heart.
Even then what do I see in one person, in
each part.?
रात का वक़्त है सूरज है मिरा राह-नुमा
देर से दूर से ये कौन बुलाता है मुझे
If is night time and my guide is sun in yonder sky.
Since long someone is calling me from a distance apart.
मेरी इन आँखों को ख़्वाबों से पशेमानी है
नींद के नाम से जो हौल सा आता है मुझे
My eyes simply regret visualising the dreams. In the name of sleep, it's fear playing the part. I
तेरा मुंकिर नहीं ऐ वक़्त मगर देखना है
बिछड़े लोगों से कहाँ कैसे मिलाता है मुझे
क़िस्सा-ए-दर्द में ये बात कहाँ से आई
मैं बहुत हँसता हूँ जब कोई सुनाता है मुझे
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