Saturday, 31 December 2022

AARZOO LAKHNAVI... COUPLETS

किस ने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी 

झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी 



टैग्ज़ : ज़ुल्फ़ और 2 अन्य 
  
 
वफ़ा तुम से करेंगे दुख सहेंगे नाज़ उठाएँगे 

जिसे आता है दिल देना उसे हर काम आता है 



टैग्ज़ : इश्क़ और 2 अन्य 
 
 
बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से 

चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका 



टैग : काँटा 
 
 
जो दिल रखते हैं सीने में वो काफ़िर हो नहीं सकते 

मोहब्बत दीन होती है वफ़ा ईमान होती है 



टैग्ज़ : इश्क़ और 3 अन्य 
 
 
हद से टकराती है जो शय वो पलटती है ज़रूर 

ख़ुद भी रोएँगे ग़रीबों को रुलाने वाले 



 
 
 
भोले बन कर हाल न पूछ बहते हैं अश्क तो बहने दो 

जिस से बढ़े बेचैनी दिल की ऐसी तसल्ली रहने दो 



टैग : बेचैनी 
  
 
ख़मोशी मेरी मअनी-ख़ेज़ थी ऐ आरज़ू कितनी 

कि जिस ने जैसा चाहा वैसा अफ़्साना बना डाला 



टैग : ख़ामोशी

दफ़अतन तर्क-ए-तअल्लुक़ में भी रुस्वाई है 

उलझे दामन को छुड़ाते नहीं झटका दे कर 



टैग : रुस्वाई 
 
 
फिर चाहे तो न आना ओ आन बान वाले 

झूटा ही वअ'दा कर ले सच्ची ज़बान वाले 



टैग : वादा 
 
 
तेरे तो ढंग हैं यही अपना बना के छोड़ दे 

वो भी बुरा है बावला तुझ को जो पा के छोड़ दे 



 
 
 
शौक़ चढ़ती धूप जाता वक़्त घटती छाँव है 
बा-वफ़ा जो आज हैं कल बे-वफ़ा हो जाएँगे 

The ardour is rising sun, passing time shade on run. 
Today who are in faith,
 'll morrow  be off faith. 

 
SOME COUPLETS OF AARZOO LAKHNAVI... TRANSLATED BY RAVI MAUN 
 
जिस क़दर नफ़रत बढ़ाई उतनी ही क़ुर्बत बढ़ी 
अब जो महफ़िल में नहीं है वो तुम्हारे दिल में है 

As hate was on the  rise, nearness came as prize. 
Now what's not in mart,
 is lodged in your heart. 

मोहब्बत नेक-ओ-बद को सोचने दे ग़ैर-मुमकिन है 
बढ़ी जब बे-ख़ुदी फिर कौन डरता है गुनाहों से 

It's impossible to differentiate , as good 'n bad in love O mate ! 
When frenzy is in the din,
then who is afraid of sin?.... (1)

It's impossible in love for thoughts of good' n bad to sneak. 
Who is afraid of the sins,
 when intoxication is at  peak? 
 
हाथ से किस ने साग़र पटका मौसम की बे-कैफ़ी पर 
इतना बरसा टूट के बादल डूब चला मय-ख़ाना भी 

Who has thrown wine-cup, 
on weather's dull make-up? 
There was such cloud- burst, 
to drown even bar as a must. 
 
खिलना कहीं छुपा भी है चाहत के फूल का 
ली घर में साँस और गली तक महक गई

Has it ever been concealed? Love bloom is just revealed. 
While you breathe at home, fragrance in lane will roam.. (1)...

Blossoming of love - flower,
no one can ever contain. 
Breathe inside home, scent spreads across the lane.. (2)

जो कुछ था न कहने का सब कह गया दीवाना 
समझो तो मुकम्मल है अब इश्क़ का अफ़्साना 

What shouldn't have been told, was expressed by fanatic bold. 
If you can simply understand, love tale has reached the end.

ख़िज़ाँ का भेस बना कर बहार ने मारा 
मुझे दो-रंगी-ए-लैल-ओ-नहार ने मारा 

Adorning the autumn dress, spring ruined me in excess. 
I was gutted in this plight, 
by two colors of day 'n night..... (1)...

In disguise of autumn, I suffered spring- plight. 
In spring I was hurt by bi-colours of day' n night.. (2). 
 
सुकून-ए-दिल नहीं जिस वक़्त से उस बज़्म में आए 
ज़रा सी चीज़ घबराहट में क्या जाने कहाँ रख दी 

There's just no peace of heart, as I 'm in her group of a sort. 
Something that's so worthless, 
I misplaced while senseless. 

वाए ग़ुर्बत कि हुए जिस के लिए ख़ाना-ख़राब 
सुन के आवाज़ भी घर से न वो बाहर निकला 

Alas poverty O mate ! 
 For whom I am desolate. 
Was not even out of home, listening my call on roam. 
 
हर साँस है इक नग़्मा हर नग़्मा है मस्ताना 
किस दर्जा दुखे दिल का रंगीन है अफ़्साना 

Each breath is a sweet song, 
always brings frenzy along. 
How far grief-stricken heart, 
imparts colour to tale of art. 

 
   SOME COUPLETS OF AARZOO LAKHNAVI... TRANSLATED BY RAVI MAUN 
 
जिस क़दर नफ़रत बढ़ाई उतनी ही क़ुर्बत बढ़ी 
अब जो महफ़िल में नहीं है वो तुम्हारे दिल में है 

As hate was on the rise, nearness came as prize. 
Now what's not in mart,
 is lodged in your heart. 

मोहब्बत नेक-ओ-बद को सोचने दे ग़ैर-मुमकिन है 
बढ़ी जब बे-ख़ुदी फिर कौन डरता है गुनाहों से 

It's impossible to differentiate , as good 'n bad in love O mate ! 
When frenzy is in the din,
then who is afraid of sin? 
 
हाथ से किस ने साग़र पटका मौसम की बे-कैफ़ी पर 
इतना बरसा टूट के बादल डूब चला मय-ख़ाना भी 

Who has thrown wine-cup, 
on weather's dull make-up? 
There was such cloud- burst, 
to drown even bar as a must. 
 
खिलना कहीं छुपा भी है चाहत के फूल का 
ली घर में साँस और गली तक महक गई

Has it ever been concealed? Love bloom is just revealed. 
While you breathe at home, fragrance in lane is to roam. 

जो कुछ था न कहने का सब कह गया दीवाना 
समझो तो मुकम्मल है अब इश्क़ का अफ़्साना 

What shouldn't have been told, was expressed by fanatic bold. 
If you can simply understand, love tale has reached the end.

ख़िज़ाँ का भेस बना कर बहार ने मारा 
मुझे दो-रंगी-ए-लैल-ओ-नहार ने मारा 

Adorning the autumn dress, spring ruined me in excess. 
I was gutted in this plight, 
by two colors of day 'n night. 
 
सुकून-ए-दिल नहीं जिस वक़्त से उस बज़्म में आए 
ज़रा सी चीज़ घबराहट में क्या जाने कहाँ रख दी 

There's just no peace of heart, as I 'm in her group of a sort. 
Something that's so worthless, 
I misplaced while senseless. 

वाए ग़ुर्बत कि हुए जिस के लिए ख़ाना-ख़राब 
सुन के आवाज़ भी घर से न वो बाहर निकला 

Alas poverty O mate ! 
 For whom I am desolate. 
Was not even out of home, listening my call on roam. 
 
हर साँस है इक नग़्मा हर नग़्मा है मस्ताना 
किस दर्जा दुखे दिल का रंगीन है अफ़्साना 

Each breath is a sweet song, 
always brings frenzy along. 
How far grief-stricken heart, 
imparts colour to tale of art. 

 
  
 

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