Wednesday 5 October 2022

REKHTA.. TODAY'S 5 + 14 COUPLETS 5.10.'22

सुना है ग़ैर की महफ़िल में तुम न जाओगे 
कहो तो आज सजा लूँ ग़रीब-खाने को
 ..... क़मर जलालवी..... 

It is heard, you won't go in the meeting of my rival. 
Today , may I decorate my cottage for your arrival? 

ग़ैर को तुम न आँख भर देखो 
क्या ग़ज़ब करते हो इधर देखो 
..... मीर हसन..... 

Don't look towards my rival full  eyed. 
What a calamity! Please look this side. 

तेरी महफ़िल से उठाता ग़ैर मुझ को क्या मजाल 
देखता था मैं कि तू ने भी इशारा कर दिया..... हसरत मोहानी..... 

How could my rival get me out of your meeting? 
That you also pointed I could see it in meeting. 

कल तक तो आश्ना थे मगर आज ग़ैर हो 
दो दिन में ये मिज़ाज है आगे की ख़ैर हो 
..... दाग़ देहलवी..... 

Yesterday you were mine, today on rival's side. 
It is the mood in two days, God save my hide! 

जानता हूं कौन क्या है आप क्यूँ दें मशवरा
मैं लुटेरों से भी वाकिफ़ और रहबर-आश्ना
..... अब्बास अल्वी..... 

I know who is who, why do you tell? 
I am aware of robbers 'n guide well. 

हम बड़े अहल-ए-ख़िरद बनते थे ये क्या हो गया 
अक़्ल का हर मशवरा दीवाना-पन लगने लगा..... इरफ़ान सिद्दीक़ी..... 

I claimed to be wise, why all this maze? 
What brain suggests, appears to be craze. 

बिछड़ने का इरादा है तो मुझ से मशवरा कर लो 
मोहब्बत में कोई भी फ़ैसला ज़ाती नहीं होता..... अफ़ज़ल ख़ान..... 

If you want to depart, let my opinion be known. 
In love, no decision can be 
 your 's alone. 

वक़्त ख़ुश ख़ुश काटने का मशवरा देते हुए 
रो पड़ा वो आप मुझ को हौसला देते हुए 
..... रियाज़ मजीद..... 

Have a nice time, so suggesting me. 
He wept himself, while encouraging me. 

मैं अपने-आप से कम भी हूँ और ज़ियादा भी। 
वो जानता भी है मुझ को तो जानता क्या है?..... सय्यद काशिफ़ रज़ा..... 

Automatically, I am less and also more. 
Even if he knows me, it it to
 the core? 

ज़मानों को उड़ानें बर्क़ को रफ़्तार देता था
मगर मुझ से कहा ठहरे हुए शाम-ओ-सहर ले जा..... ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर..... 

He gave flights to worlds 'n to electricity, speed. 
But to me he said, take static night' n day indeed. 

किधर से बर्क़ चमकती है देखें ऐ वाइज़ 
मैं अपना जाम उठाता हूँ तू किताब उठा 
..... जिगर मुरादाबादी..... 

O priest! Let's see which way does lightning strike. 
You pick up the Holy Book,while a wine cup I hike! 

हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें 
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं 
..... साहिर लुधियानवी..... 

Let there be thousands of lightening and lacs of storm. 
The buds supposed to bloom would bloom as a norm ! 

निगाह बर्क़ नहीं चेहरा आफ़्ताब नहीं 
वो आदमी है मगर देखने की ताब नहीं 
..... जलील मानिकपुरी ..... 

Neither eye is electricity nor face is the sun. 
He is human but the glow can be seen by none. 

कहाँ हैं आज वो शम'अ-ए-वतन के परवाने। 
बने हैं आज हक़ीक़त उन्हीं के अफ़्साने।..... सिराज लखनवी..... 

Where are those moths of  national flame? 
True stories are drafted in their name. 

इक बार उस ने मुझ को देखा था मुस्कुरा कर 
इतनी तो है हक़ीक़त बाक़ी कहानियाँ हैं 
..... मेला राम वफ़ा.... 

Only once, she saw me with a smile. 
This is true, rest are tales all the while. 

हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन 
दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है..... मिर्ज़ा ग़ालिब..... 

I know the truth about heaven, a whole lot.
 O 'Ghalib' to please heart, it's a nice thought. 

तू कहानी ही के पर्दे में भली लगती है 
ज़िंदगी तेरी हक़ीक़त नहीं देखी जाती 
अख्तर सईद ख़ान..... 

You appear good only on the canvas of tale.
 Life ! Your truth isn't worth seeing , pale. 

 आशियाँ जल गया गुल्सिताँ मिट गया  हम क़फ़स से निकल कर किधर जाएँगे? 
इतने मानूस सय्याद से हो गए, अब रिहाई मिलेगी तो मर जाएँगे। 
..... राज़ इलाहाबादी..... 

Burnt is the nest, garden laid to rest, out of cage where 'll I go?
I' m so well versed with hunter, if released,  'd be a death blow. 












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