Thursday 29 September 2022

REKHTA.. TODAY'S 5 +.. COUPLETS

मैं आख़िर आदमी हूँ कोई लग़्ज़िश हो ही जाती है 
मगर इक वस्फ़ है मुझ में दिल-आज़ारी नहीं करता 
आसिफ़ करनाली

After all I am a man, some wavering is done . 
But there's a virtue, I don't 
hurt anyone. 

जो चश्म-ए-दिल-रुबा के वस्फ़ में अशआ'र लिखता हूँ 
तो हर हर लफ़्ज़ पर अहल-ए-नज़र इक साद करते हैं 
दत्तात्रिया कैफ़ी 

When I was write couplets on virtues of beloved' s eye. 
On every term, those who can discern, heave a mild sigh. 

ज़ाहिद सुनाऊँ वस्फ़ जो अपनी शराब के 
पढ़ने लगें दरूद फ़रिश्ते सवाब के 
इमदाद अली 

O priest ! If I narrate virtues of my wine for some time. 
Invocation will be read by the virtuous angels in prime. 

दीदनी है शिकस्तगी दिल की 
क्या इमारत ग़मों ने ढाई है
मीर तक़ी मीर

Worth watching is shattered heart. 
Grief razed what a mansion 
of art!

दीदनी है तिरे इताब का रंग ।
शीश-ए-चश्म में शराब का रंग
राबिया पिन्हाँ

Worth seeing is your anger colour. 
A glass of eyes with  wine
 colour.

दीदनी है अब शिकस्त-ए-ज़ब्त की बे-चारगी 
मुस्कुराता हूँ मगर दिल दर्द से लबरेज़ है 
अकबर हैदरी कश्मीरी 

Worth looking is helplessness of self control after defeat.
 I smile all the while, when  heart 's filled with pain so neat. 

समझा है हक़ को अपने ही जानिब हर एक शख़्स।
ये चाँद उस के साथ ही गया जो जिधर गया।
.... पंडित दया शंकर नसीम लखनवी....

Every one has thought of right, on his side with whole might.
Whichever way anyone goes, has moon with him in sight. 

मुझे दोस्त कहने वाले ज़रा दोस्ती निभा दे 
ये मुतालबा है हक़ का कोई इल्तिजा नहीं है शकील बदायूनी 

You who call me a friend, just friendship defend. 
It's a demand of right, not a request of any blend. 

बोलते क्यूँ नहीं मिरे हक़ में 
आबले पड़ गए ज़बान में क्या 
जौन एलिया

Why don't you speak in my favour? 
Are there blisters on tongue cover ? 

उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में 
इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए वसीम बरेलवी 

In this world only he has the right to exist. 
Who appears to be on a side, but other persist{

है फ़हम उस का जो हर इंसान के दिल की ज़बाँ समझे। 
सुख़न वो है जिसे हर शख़्स अपना ही बयाँ समझे। 
जितेंद्र मोहन सिन्हा रहबर

It's sensibility that understands language of each heart. 
When everyone thinks, poem's about me, it's a work of art. 

निगह बुलंद सुख़न दिल-नवाज़ जाँ पुर-सोज़ 
यही है रख़्त-ए-सफ़र मीर-ए-कारवाँ के लिए..... अल्लामा इक़बाल.... 

Sights high, poems to pacify, heart rendering cry. 
These are journey needs,for whoever caravan leads. 


मैं सुख़न में हूँ उस जगह कि जहाँ 
साँस लेना भी शाइरी है मुझे 
..... तहज़ीब हाफ़ी.....

In poetry, I 've mainfained that space. 
Even my breath is a poem of grace. 

शहर में किस से सुख़न रखिए किधर को चलिए 
इतनी तन्हाई तो घर में भी है घर को चलिए 
..... नसीर तुराबी..... 

Whom to talk with in city, where to go? 
Home too is as solitary, so let us go. 

हमारी मुस्कराहट पर न जाना। 
दिया तो क़ब्र पर भी जल रहा है
..... आनिस मुइन..... 

Don't get fooled by my smile. 
Lamp graces grave for awhile. 

मेरे होंटों पे मुस्कुराहट है 
गरचे सीने में दाग़ रखता हूँ 
..... शब्बीर नाक़िद..... 

My lips have a smile in mart. 
Though there's a scar in heart. 

मुस्कुराहट है हुस्न का ज़ेवर 
मुस्कुराना न भूल जाया करो 
..... अब्दुल हमीद अदम..... 

An ornament of beauty, is smile.
Don't forget it, even for a while. 

No comments:

Post a Comment